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गिल कलां: सामुदायिक जल प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण

गिल कलां गांव ने सामुदायिक जल प्रबंधन में एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है, जहां सक्रिय जनभागीदारी के माध्यम से हर घर तक नल जल आपूर्ति की गई है। डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने गांव के प्रयासों की सराहना की है, जिससे बठिंडा जिले को राष्ट्रीय पहचान मिली है। जानें कैसे जागरूकता और विश्वास ने ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों को बदल दिया है और गिल कलां को एक मॉडल गांव बना दिया है।
 

गांव गिल कलां की जल प्रबंधन सफलता

बठिंडा - रामपुरा ब्लॉक का गिल कलां गांव सामुदायिक जल प्रबंधन का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है। यहां की सक्रिय जनभागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी ने हर घर तक नल जल आपूर्ति की एक सफल और स्थायी व्यवस्था स्थापित की है।


डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने बताया कि गांव के जल प्रबंधन प्रयासों को जल जीवन मिशन के तहत आयोजित ‘सुजल ग्राम संवाद’ वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में सराहा गया। इससे बठिंडा जिले को प्रभावी जनभागीदारी और टिकाऊ जल आपूर्ति प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय पहचान मिली है।


उन्होंने कहा कि गिल कलां ने यह साबित किया है कि जागरूकता और जनता का विश्वास ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों को कैसे बदल सकता है। गांव की नहर आधारित जल आपूर्ति योजना को 2020 में 2.96 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड किया गया था। इसके बाद 2021-22 में इस योजना को और मजबूत किया गया। सितंबर 2022 में इसे ग्राम पंचायत वाटर सप्लाई कमेटी (GPWSC) को सौंप दिया गया।


गांव के सभी 784 घरों में अब कार्यशील नल जल कनेक्शन उपलब्ध हैं। पहले कई ग्रामीण सप्लाई के पानी का उपयोग करने में हिचकिचा रहे थे और सबमर्सिबल पंप के पानी को प्राथमिकता देते थे। लेकिन नियमित जागरूकता अभियानों और जल गुणवत्ता परीक्षणों ने लोगों का विश्वास बढ़ाया। पारदर्शी परीक्षण प्रक्रिया और सकारात्मक परिणामों के चलते ग्रामीणों ने स्वेच्छा से घरेलू जल कनेक्शन के लिए आवेदन किया, जिससे 100 प्रतिशत कवरेज हासिल हुआ।


डी.सी. राजेश धीमान ने बताया कि गांव में अब प्रतिदिन चार घंटे पीने योग्य पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिसका प्रबंधन ग्राम पंचायत वाटर सप्लाई कमेटी द्वारा किया जा रहा है। समिति ने सिस्टम के सुचारू संचालन के लिए एक निजी पंप ऑपरेटर नियुक्त किया है। उन्होंने कहा कि वार्षिक संचालन खर्च पूरे करने के बावजूद समिति को हर साल लगभग 2 लाख रुपये की आय हो रही है और जल आपूर्ति संचालन से करीब 6 लाख रुपये की बचत जमा हो चुकी है।


उन्होंने गांव की पंचायत, वाटर सप्लाई कमिटी के सदस्यों, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों की सराहना की, जिन्होंने योजना की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से कार्य किया। लगातार जागरूकता शिविर, सामुदायिक बैठकें और जल परीक्षण गतिविधियां जनभागीदारी और जवाबदेही बनाए रखने में सहायक साबित हो रही हैं, जिससे गिल कलां सामुदायिक प्रबंधन आधारित जल आपूर्ति प्रणालियों के लिए एक मॉडल गांव बन गया है।