×

चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए बाहर जाना क्यों है मना?

चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को बाहर जाने से मना करने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं। जानें कि कैसे ग्रहण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है और सूतक काल के दौरान क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए। 03 मार्च को होने वाले चंद्र ग्रहण के सूतक काल और इसके प्रभावों के बारे में विस्तार से जानें।
 

धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
चंद्र ग्रहण, नई दिल्ली: हर वर्ष दो या तीन बार सूर्य और चंद्र ग्रहण होते हैं। खगोल विज्ञान के अनुसार, ये घटनाएँ विशेष खगोलीय घटनाएँ मानी जाती हैं, जबकि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इन्हें अशुभ माना जाता है। ग्रहण के समय कई नियम और परंपराएँ निभाई जाती हैं, जिनमें सूतक काल प्रमुख है। सूर्य ग्रहण का सूतक काल 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण का 9 घंटे पहले शुरू होता है।


03 मार्च को होगा पहला चंद्र ग्रहण

फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन 03 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण होगा। यह भारत में दिखाई देगा और इसका सूतक काल मान्य होगा। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से घर में रहने की सलाह दी जाती है। यह नियम धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं कि चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को बाहर जाने से क्यों रोका जाता है और सूतक काल कब से कब तक रहेगा?


शिशु पर नकारात्मक प्रभाव का खतरा

धर्म और ज्योतिष के अनुसार, जब राहु और केतु सूर्य या चंद्रमा को ढकते हैं, तब ग्रहण होता है। इस समय इन ग्रहों का प्रभाव बहुत अधिक होता है। यदि गर्भवती महिला ग्रहण के समय बाहर जाती है, तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे शिशु के अंगों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है और जन्मजात रोगों का खतरा बढ़ सकता है।


वैज्ञानिक कारण

विज्ञान के अनुसार, ग्रहण के समय कुछ हानिकारक किरणें पृथ्वी पर आती हैं। इन किरणों का संपर्क गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए, उन्हें ग्रहण के समय घर के भीतर रहने की सलाह दी जाती है, ताकि मां और शिशु दोनों सुरक्षित रहें।


चंद्र ग्रहण 2026 का सूतक काल

03 मार्च, मंगलवार को चंद्र ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। इसका सूतक काल सुबह 09:06 बजे से शुरू होगा और शाम 06:47 बजे तक चलेगा।