चैत्र नवरात्रि की शुरुआत: कलश स्थापना का सही समय और विधि
चैत्र नवरात्रि का महत्व
प्रयागराज: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस अवसर पर माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 तारीख से आरंभ हो रही है, जो हिंदू नववर्ष के साथ भी मेल खाती है, जिससे यह दिन और भी खास बन जाता है। इस विषय पर पंडित शिप्रा सचदेव ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।
कलश स्थापना का मुहूर्त
पंडित शिप्रा सचदेव ने बताया कि कलश स्थापना का सही मुहूर्त सुबह 6:50 बजे से 7:52 बजे तक है। इसके अलावा, अभिजित मुहूर्त 12:05 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। इस बार केवल ये दो मुहूर्त उपलब्ध हैं, इसलिए कलश स्थापना के लिए इन्हीं समयों का चयन करना उचित रहेगा। कलश स्थापना का महत्व अत्यधिक है, इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ करना चाहिए।
कलश स्थापना की विधि
उन्होंने कहा कि माता रानी इस बार पालकी में सवार होकर आ रही हैं। कलश स्थापना के समय आपकी श्रद्धा और इच्छाएं महत्वपूर्ण हैं। स्थापना के दौरान नौ लौंग लेकर उन्हें कलावे में बांधकर माला बनाएं और पहले दिन माता के गले में अर्पित करें। इससे मां का आशीर्वाद आपके ऊपर बना रहेगा।
कलश के लिए आप सोने, चांदी या किसी अन्य धातु का कलश ले सकते हैं, लेकिन मिट्टी का कलश सबसे शुभ माना जाता है। इसमें सबसे पहले जल भरें, थोड़ा गंगाजल, हल्दी का एक गांठ, सुपारी, दो लौंग और दो इलायची डालें। इसके साथ एक सिक्का, थोड़ा अक्षत और फूल भी डाल सकते हैं। इसके बाद, पांच या सात आम के पत्ते या अशोक के पत्ते रखें।
इसके बाद कलश के ऊपर एक दियली रखें और उसमें चावल भरें। फिर नारियल को लाल कपड़े में बांधकर कलश के ऊपर रखें। इस पूरी प्रक्रिया के बाद कलश को माता के चरणों में समर्पित करें।