जलेबी के स्वाद से संत बनने की प्रेरणा: तरुण सागर महाराज की कहानी
तरुण सागर महाराज का अद्भुत सफर
नई दिल्ली: यह सुनने में अजीब लग सकता है कि कोई व्यक्ति जलेबी का आनंद लेते हुए प्रवचन सुनकर संत बन सकता है। यही कहानी प्रसिद्ध जैन मुनि तरुण सागर महाराज की है, जिन्हें प्रवचन के लिए विश्वभर में जाना जाता है। उन्हें जलेबी का बहुत शौक था।
26 जून 1967 को मध्य प्रदेश के दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के छोटे से गांव गुहंची में प्रताप चंद जैन के घर एक बेटे का जन्म हुआ। परिवार में उन्हें प्यार से 'मुन्ना' कहा जाता था, जबकि स्कूल में उनका नाम पवन रखा गया। वह चार भाइयों और तीन बहनों में चौथे थे।
पवन बचपन में रोज स्कूल जाते समय एक दुकान पर जलेबी खाते थे। जब वह लगभग 13 वर्ष के थे, तब एक दिन उस दुकान पर उनके जीवन की दिशा बदल गई। जलेबी खाते समय उन्होंने आचार्यश्री पुष्पदंत सागर महाराज के प्रवचन सुने, जिसमें बताया गया कि मनुष्य अपने कर्मों से भगवान बनने की ओर बढ़ सकता है। यह विचार पवन के मन में गहराई से बैठ गया।
घर लौटकर, पवन ने अपने माता-पिता को संत बनने की इच्छा बताई। परिवार ने उन्हें समझाने की कोशिश की, और माता-पिता उन्हें आचार्यश्री के पास ले गए। आचार्यश्री ने कहा कि पवन को दस दिन उनके पास रहने दिया जाए, ताकि वह अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकें। लेकिन दस दिन बाद भी पवन अपने संकल्प पर अडिग रहे।
आखिरकार, उन्होंने आचार्यश्री से दीक्षा ली और 'तरुण सागर' नाम प्राप्त किया। 13 वर्ष की आयु में उन्होंने एलक के रूप में दीक्षा ली, और 20 वर्ष की उम्र में दिगंबर मुनि की उपाधि प्राप्त की। यह संकल्प उनके लिए एक पहचान बन गया।
तरुण सागर महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से अहिंसा, आत्मसंयम, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश फैलाया। उनकी बेबाक वाणी के कारण उन्हें 'कड़वे प्रवचन' के लिए जाना जाता था। उन्होंने लाल किले और भारतीय सेना के जवानों को भी संबोधित किया।
ब्रह्मचर्य जीवन में, तरुण सागर महाराज केवल तीन बार अपने गांव गुहंची लौटे और हर बार गांव की धर्मशाला में ठहरे। जहां उनका बचपन बीता, वहीं से उनका आध्यात्मिक सफर शुरू हुआ।
1 सितंबर 2018 को, 51 वर्ष की आयु में, तरुण सागर महाराज ने दिल्ली के कृष्णा नगर में अपने चातुर्मास स्थल पर सुबह 3:18 बजे देह त्याग दी। वह लंबे समय से बुखार और पीलिया से पीड़ित थे। देह त्यागने से एक दिन पहले उन्होंने औषधि का सेवन बंद कर दिया था।