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जवारे विसर्जन: सही समय और विधि जानें

चैत्र नवरात्रि के समापन पर जवारे विसर्जन का महत्व और विधि जानें। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कब और कैसे जवारे विसर्जित करें, साथ ही शुभ मुहूर्त और मंत्र भी साझा करेंगे। जानें इस विशेष अवसर पर क्या करना चाहिए और किस समय पर विसर्जन करना उचित रहेगा।
 

जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र


Jware Visarjan, नई दिल्ली: आज, 27 मार्च को चैत्र नवरात्रि का समापन होगा। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी और राम नवमी का पर्व भी मनाया जाएगा। नवरात्रि के पहले दिन स्थापित कलश का विसर्जन नवमी तिथि को किया जाता है। इस दिन कन्या पूजन और हवन का विशेष महत्व है, साथ ही जौ का विसर्जन भी महत्वपूर्ण माना जाता है।


नवरात्रि के पहले दिन बोए जाते हैं जवारे

जौ को जवारे भी कहा जाता है। देवी दुर्गा की शक्ति और समृद्धि के प्रतीक के रूप में नवरात्रि के पहले दिन जवारे बोए जाते हैं और इन्हें नवरात्रि के नौ दिनों तक सींचा जाता है।


चैत्र नवरात्रि 2026 जवारे विसर्जित करने का मुहूर्त


  • सुबह 07:58 से 09:29 तक

  • दोपहर 12:07 से 12:56 तक (अभिजीत मुहूर्त)

  • दोपहर 12:32 से 02:03 तक

  • दोपहर 03:34 से 05:05 तक


जवारे विसर्जित करने की विधि

दशमी तिथि पर मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीप जलाएं और मां को प्रणाम करें। फिर जवारे को एकत्र करें और उन्हें सिर पर रखकर पवित्र नदी, तालाब या बहते पानी में विसर्जित करें। यदि ऐसा संभव न हो, तो इन्हें किसी गमले या बगीचे में डाल सकते हैं। बस इन्हें फेंकें नहीं। विधि के अनुसार जवारे विसर्जित करने के बाद देवी मां से घर की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।


जवारे विसर्जित करने के मंत्र


  • रूपं देहि यशो देहि भाग्यं भगवति देहि मे। पुत्रान देहि धनं देहि सर्वान् कामांश्च देहि मे।। महिषघ्नि महामाये चामुण्डे मुण्डमालिनी। आयुरारोग्यमैश्वर्यं देहि देवि नमोस्तु ते।।

  • गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि। पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च।।