जसवंत सिंह खालरा: मानवाधिकार कार्यकर्ता की प्रेरणादायक कहानी
जसवंत सिंह खालरा की जीवनी
Satluj X Review, टरटेनमेंट डेस्क: जसवंत सिंह खालरा की जीवन गाथा पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' अब रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म लगभग तीन साल तक सर्टिफिकेशन के लिए संघर्ष करती रही। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जसवंत सिंह खालरा कौन थे? आइए जानते हैं।
1980 के दशक में बैंक में कार्यरत
जसवंत सिंह खालरा का जन्म 1952 में अमृतसर जिले के खालरा गांव में हुआ। वे एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता थे, जिन्होंने पंजाब में उग्रवाद के दौरान कथित गैर-कानूनी हत्याओं और गुप्त अंतिम संस्कारों का पर्दाफाश किया। उन्होंने 1980 के दशक में एक बैंक कर्मचारी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।
महत्वपूर्ण घटनाओं का प्रभाव
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या और 1984 के सिख-विरोधी दंगों ने खालरा को गहराई से प्रभावित किया। इस दौरान, कई सिख परिवारों ने बताया कि उनके रिश्तेदारों को पंजाब पुलिस द्वारा उठाया गया और वे लापता हो गए। जसवंत ने इस मुद्दे पर जानकारी इकट्ठा करना शुरू किया।
नगर निगम के रिकॉर्ड तक पहुंच
जसवंत की खोज ने उन्हें अमृतसर नगर निगम के रिकॉर्ड तक पहुंचाया, जहां उन्होंने हजारों लोगों के नाम और विवरण पाए, जिनकी पुलिस ने बिना परिवारों को सूचित किए हत्या कर दी थी। उनकी खोजों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया।
1995 में लापता हुए जसवंत
1995 में, जसवंत सिंह खालरा खुद लापता हो गए। खालिस फाउंडेशन के अनुसार, उन्हें आखिरी बार अपने घर के बाहर कार धोते हुए देखा गया था। अगले वर्ष, सीबीआई ने सबूत पाए कि उन्हें तरनतारन के एक पुलिस स्टेशन में रखा गया था।
कई वर्षों तक कानूनी लड़ाई चली। 16 अक्टूबर 2007 को, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। जसवंत के परिवार में उनकी पत्नी परमजीत कौर और दो बच्चे, नवकिरण कौर और जनमीत सिंह शामिल हैं।