ज्येष्ठ पूर्णिमा: वट पूर्णिमा का महत्व और पूजा विधि
वट पूर्णिमा का महत्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन वट सावित्री व्रत मनाया जाता है, जिसे कई स्थानों पर वट पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह व्रत खासकर विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा करने से अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून को मनाया जाएगा।
वट पूर्णिमा का महत्व
वट पूर्णिमा केवल एक व्रत नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इसलिए विवाहित महिलाएं इस व्रत को श्रद्धा से करती हैं।
सावित्री और सत्यवान की कथा
वट पूर्णिमा का संबंध पौराणिक कथा सावित्री-सत्यवान से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार, जब सत्यवान की आयु समाप्त होने वाली थी और यमराज उनके प्राण लेने आए, तब सावित्री ने अपनी बुद्धिमानी और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज को प्रसन्न कर लिया। अंततः यमराज ने सत्यवान को पुनर्जीवन का वरदान दिया। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना के लिए मनाया जाने लगा।
बरगद के पेड़ की पूजा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, वट यानी बरगद का वृक्ष दीर्घायु, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। इसलिए वट पूर्णिमा के दिन बरगद के वृक्ष की पूजा की जाती है और उसके चारों ओर कच्चा सूत लपेटा जाता है।
वट पूर्णिमा की पूजा विधि
वट पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद बरगद के पेड़ के नीचे जल, रोली, अक्षत, फूल, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। महिलाएं वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती या पढ़ती हैं। अंत में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और वट वृक्ष की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
वट पूर्णिमा पर क्या करें?
व्रत के दिन श्रद्धा और नियमों का पालन करें। बरगद के वृक्ष की विधि-विधान से पूजा करें, सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण करें और जरूरतमंदों को दान दें। इस दिन घर में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना और सकारात्मक विचार रखना भी शुभ माना जाता है।