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तमिलनाडु का अनोखा मध्य कैलाश मंदिर: आधे गणेश और आधे हनुमान की अद्भुत मूर्ति

तमिलनाडु का मध्य कैलाश मंदिर एक अनोखा धार्मिक स्थल है, जहां आधे हनुमान और आधे गणेश जी की मूर्तियां स्थापित हैं। इस मंदिर की विशेषता इसकी अद्वितीय प्रतिमा है, जिसे आद्यंत प्रभु के रूप में पूजा जाता है। जानें इस मंदिर के इतिहास, महत्व और यहां की विशेष पूजा विधियों के बारे में।
 

मंदिर का अनोखा स्वरूप

आपने भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के अर्धनारीश्वर स्वरूप के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां आधे हनुमान और आधे गणेश जी की मूर्तियां हैं? यह मंदिर तमिलनाडु के नादुक्कयिलाई में स्थित मध्य कैलाश मंदिर है, जो दक्षिण चेन्नई में स्थित है। इस लेख में हम इस विशेष मंदिर के बारे में जानकारी साझा करेंगे।


मंदिर में अद्वितीय मूर्तियां

मध्य कैलाश मंदिर अपनी अनोखी मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थापित आधे गणेश और आधे हनुमान जी की मूर्ति को आद्यंत प्रभु के रूप में जाना जाता है, जो भगवान श्रीगणेश और हनुमान जी के स्वरूप में विलीन है।


प्रतिमा के दाहिने हिस्से में गणेश जी और बाईं ओर हनुमान जी की मूर्ति है। इस अद्भुत मूर्ति का कुंभाभिषेकम 1994 में हुआ था, और तब से भक्त दूर-दूर से इस मंदिर में आकर आद्यंत प्रभु की अनोखी प्रतिमा का दर्शन करते हैं।


मंदिर से जुड़ी रोचक जानकारी

मंदिर के एक अधिकारी को इस अद्वितीय रूप के दर्शन हुए थे, जिसके बाद इस मूर्ति का निर्माण किया गया। आद्यंत प्रभु की आरती के लिए कपूर जलाया जाता है, और दोपहर में पुजारी मूर्ति का स्नान कराते हैं और गीले कपड़ों में अनुष्ठान करते हैं।


आद्यंत प्रभु का नाम और महत्व

आद्यंत प्रभु का नाम उस स्वरूप को दर्शाता है, जिसका न तो कोई उद्गम है और न ही अंत। हिंदू शास्त्रों में हनुमान जी को चिरंजीवी माना गया है, जबकि भगवान गणेश का जन्म दो बार हुआ था। इस मंदिर में आधे हनुमान और आधे गणेश जी की मूर्ति स्थापित है, जिन्हें रूद्र का रूप भी कहा जाता है।


मंदिर में भगवान शिव, वेंकट आनंद विनायकर, भगवान विष्णु और भगवान सूर्य की भी मूर्तियां हैं, जो भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती हैं।