दिसंबर में यूपीआई लेन-देन में अभूतपूर्व वृद्धि
यूपीआई ट्रांजैक्शन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
नई दिल्ली: पिछले दिसंबर में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से लेन-देन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में यूपीआई के जरिए 21.63 अरब लेन-देन हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान कुल लेन-देन की राशि भी 20 प्रतिशत बढ़कर 27.97 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
महीने के आधार पर भी यूपीआई लेन-देन की संख्या और राशि में अच्छी वृद्धि हुई। दिसंबर में औसतन रोजाना 90,217 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ, जबकि नवंबर में यह आंकड़ा 87,721 करोड़ रुपए था। दिसंबर में रोजाना औसतन 698 मिलियन (लगभग 69.8 करोड़) यूपीआई लेन-देन हुए, जो नवंबर के 682 मिलियन से अधिक हैं।
नवंबर में यूपीआई लेन-देन की संख्या 20.47 अरब रही, जो सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। उस महीने की कुल लेन-देन राशि 26.32 लाख करोड़ रुपए रही, जिसमें 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
इसी समय, इंस्टेंट मनी ट्रांसफर सिस्टम (आईएमपीएस) के माध्यम से दिसंबर में कुल 6.62 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है और नवंबर के 6.15 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा है।
आईएमपीएस के जरिए दिसंबर में 380 मिलियन लेन-देन हुए, जबकि नवंबर में यह संख्या 369 मिलियन थी। रोजाना आईएमपीएस से होने वाला लेन-देन 21,269 करोड़ रुपए रहा, जो नवंबर में 20,506 करोड़ रुपए था।
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड हैं, जो जुलाई 2024 के बाद से 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं। किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और गांवों में क्यूआर कोड की उपलब्धता ने स्कैन करके भुगतान को पूरे देश में सामान्य बना दिया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि व्यक्ति से दुकानदार (पी2एम) लेन-देन, व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) लेन-देन से अधिक रहे। इसका अर्थ है कि लोग रोजमर्रा की खरीदारी में यूपीआई का अधिक उपयोग कर रहे हैं।
पी2एम लेन-देन 35 प्रतिशत बढ़कर 37.46 अरब हो गए, जबकि पी2पी लेन-देन 29 प्रतिशत बढ़कर 21.65 अरब हो गए। औसतन हर लेन-देन की राशि 1,262 रुपए हो गई, जो पहले 1,363 रुपए थी। यह दर्शाता है कि लोग अब छोटे-छोटे भुगतानों जैसे यात्रा, भोजन, दवा और स्थानीय खरीदारी के लिए यूपीआई का अधिक उपयोग कर रहे हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) ने लोगों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे शहरों और गांवों के बीच की दूरी कम हुई है और भारत एक मजबूत डिजिटल देश के रूप में उभरा है।