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नई ईपीएफ योजना: बीमारी और शादी के लिए पूरी राशि निकालने की सुविधा

केंद्र सरकार ने नई ईपीएफ योजना लागू की है, जिसमें नौकरीपेशा लोग बीमारी, शादी और शिक्षा के लिए अपने खाते से पूरी राशि निकाल सकते हैं। इस योजना के तहत निकासी के लिए कुछ नियम और शर्तें हैं, जैसे कि खाते में 25% न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना आवश्यक है। जानें इस योजना के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में, जैसे कंपनियों के लिए रिटर्न भरने की समय सीमा और कर्मचारी योगदान की प्रक्रिया।
 

नई ईपीएफ योजना के नियम


निकासी के लिए न्यूनतम बैलेंस की आवश्यकता
केंद्र सरकार ने 29 जून से सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत नई ईपीएफ योजना लागू की है, जो 1952 की पुरानी व्यवस्था को बदलती है। इस योजना के अंतर्गत, नौकरीपेशा लोग बीमारी, शिक्षा, शादी और घर जैसी आवश्यकताओं के लिए अपने खाते से 75% तक की राशि निकाल सकते हैं।


हालांकि, निकासी के बाद खाते में कुल जमा राशि का 25% न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना अनिवार्य है। लेनदेन के लिए सदस्यों को आधार, पैन और लिंक बैंक खाता होना आवश्यक है।


कंपनियों के लिए रिटर्न भरने की समय सीमा

नियोक्ताओं के लिए ठेकेदार अनुपालन, ओनरशिप का खुलासा और इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग अनिवार्य है। प्राइवेट पीएफ ट्रस्टों की रिपोर्टिंग पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। कंपनियों को 15 दिनों के भीतर रिटर्न भरना होगा। इसके अलावा, छूटे कर्मचारियों के लिए ईईसी 2026, पुराने मुकदमों के लिए विश्वास 2026 और एमनेस्टी 2026 की शुरुआत की गई है।


कर्मचारी की इच्छा पर योगदान

एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड आर्गनाइजेशन ने बताया है कि कानूनी वेतन सीमा (जो वर्तमान में 15,000 रुपए प्रति माह है) तक 12% का योगदान अनिवार्य है। इसके अलावा, इससे अधिक का योगदान स्वैच्छिक माना जाएगा।


यदि आपकी बेसिक सैलरी 1 लाख रुपए प्रति माह है, तो आपके पीएफ योगदान के रूप में 1,800 रुपए काटे जाएंगे। नियोक्ता भी उतना ही योगदान देगा। हालांकि, आपके पास बची हुई सैलरी में से कुछ हिस्सा रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए जमा करने का विकल्प भी होगा।


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