नासा की नई स्पेस रणनीति: चंद्रमा पर वापसी और वाणिज्यिक गतिविधियों का विस्तार
नासा की नई स्पेस रणनीति
वाशिंगटन: अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने भविष्य के लिए अपनी नई स्पेस रणनीति के तहत तीन प्रमुख लक्ष्यों की घोषणा की है। इनमें 2028 तक मानवों को चंद्रमा पर पुनः भेजना, वहां एक स्थायी बेस स्थापित करना और लो-अर्थ ऑर्बिट में वाणिज्यिक गतिविधियों का विस्तार करना शामिल है। नासा के प्रशासक जेरेड आइजकमैन ने बताया कि यह योजना अमेरिका की राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के अनुरूप है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अमेरिका की स्थिति को मजबूत करने के लिए बनाई गई है।
आइजकमैन ने स्पष्ट किया, "हमारा उद्देश्य चंद्रमा पर लौटना, लॉन्च की संख्या को बढ़ाना और 2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारना है।" उन्होंने बताया कि यह नासा के आगामी मिशनों का मुख्य फोकस है।
उन्होंने आगे कहा कि एजेंसी केवल चंद्रमा तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वहां दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से लैंडर, रोवर, पावर सिस्टम और संचार तकनीक जैसी आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जाएगा।
नासा की रणनीति का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू लो-अर्थ ऑर्बिट में वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसमें प्राइवेट स्पेस स्टेशन को प्रोत्साहित किया जाएगा और उद्योगों के लिए नए अवसरों का निर्माण किया जाएगा। आइजकमैन ने कहा, "हम उद्योग के साथ मिलकर वाणिज्यिक अंतरिक्ष यात्री मिशनों और उससे जुड़े आय के अवसरों को बढ़ाना चाहते हैं।"
उन्होंने यह भी बताया कि नासा अब अपने संसाधनों के उपयोग में बदलाव कर रहा है। एजेंसी बड़े और महंगे प्रोजेक्ट्स से हटकर छोटे, लक्षित और परिणाम देने वाले निवेश पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले कई मिशनों में लागत बढ़ने और देरी जैसी समस्याएं आई हैं, जिससे सुधार की आवश्यकता महसूस हुई।
आइजकमैन ने कहा, "हम ऐसे कार्यक्रम नहीं बना सकते जो इतने बड़े हों कि विफल न हो सकें, लेकिन इतने महंगे भी हों कि सफल न हो पाएं।" उन्होंने कहा कि नासा को खर्च के बजाय परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
उन्होंने लॉन्च की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि मिशनों के बीच अधिक अंतराल प्रगति को धीमा कर देता है। हाल ही में हुए आर्टेमिस II मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब कार्यक्रम सही तरीके से लागू होते हैं, तो बड़े परिणाम सामने आते हैं। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर घुमाकर सुरक्षित वापस लाया गया था।
उन्होंने कहा, "हमने दुनिया को फिर से चंद्रमा दिखाया और मानवता को पृथ्वी का नया नजरिया दिया।"
नई योजना के तहत नासा सैटेलाइट लॉन्च और अर्थ ऑब्जर्वेशन जैसे कार्यों के लिए निजी कंपनियों पर अधिक निर्भर रहेगा, जबकि खुद गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण और न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसे जटिल मिशनों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
हालांकि, इस रणनीति पर सांसदों ने कुछ चिंताएं भी व्यक्त की हैं। सुनवाई के दौरान बताया गया कि प्रस्तावित बजट में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 23 प्रतिशत की कटौती की गई है, जिससे इन लक्ष्यों को प्राप्त करना कठिन हो सकता है।
स्पेस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने चेतावनी दी कि कम फंडिंग से अमेरिका की स्पेस प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है, खासकर जब चीन तेजी से अपने चंद्र मिशनों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, "नासा को कम फंड देना समझदारी नहीं है।"
वहीं, रैंकिंग मेंबर जो लोफग्रेन ने कहा कि इस योजना से विज्ञान और तकनीक के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं, विशेषकर वे क्षेत्र जो मानव अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े नहीं हैं।
अन्य विधायकों ने वर्कफोर्स, अर्थ साइंस मिशन और एरोनॉटिक्स रिसर्च पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए, साथ ही निजी कंपनियों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंता जताई।
इस पर आइजकमैन ने उत्तर दिया कि नासा हमेशा कानून के अनुसार कार्य करेगा और संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सीमित संसाधनों में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं, बशर्ते बेकार खर्च को समाप्त कर मुख्य लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
1958 में स्थापित नासा लंबे समय से अंतरिक्ष अन्वेषण में दुनिया का नेतृत्व करता रहा है, चाहे वह अपोलो कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर लैंडिंग हो या अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का निर्माण। हाल के वर्षों में, विशेषकर चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण, चंद्रमा मिशनों और पृथ्वी से बाहर मानव उपस्थिति पर फिर से जोर दिया गया है। इसी दिशा में आर्टेमिस कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य 1972 के बाद पहली बार मानवों को चंद्रमा पर वापस भेजना है।