पंजाब के शिक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार, सीएम मान ने पेश किया रिपोर्ट कार्ड
मुख्यमंत्री भगवंत मान का शिक्षा विभाग का रिपोर्ट कार्ड
चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य के शिक्षा विभाग का चार साल का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस भी उनके साथ थे। सीएम मान ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने सरकारी स्कूलों की अनदेखी की, जबकि उनकी सरकार ने 'दिल्ली मॉडल' को सफलतापूर्वक लागू किया है, जिससे पंजाब में शिक्षा के स्तर में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।
शिक्षा के लिए 19 हजार करोड़ का बजट
मुख्यमंत्री ने बताया कि किसी भी देश की प्रगति की नींव शिक्षा होती है, लेकिन भारत में 'इंडिया' और 'भारत' के नाम पर दो तरह की शिक्षा दी जा रही है। 'इंडिया' की शिक्षा केवल अमीरों के लिए है, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस बार 19,273 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है। मान ने यह भी दावा किया कि पंजाब ने अब शिक्षा के क्षेत्र में केरल को पीछे छोड़ दिया है।
स्कूल ऑन व्हील और सुरक्षा उपाय
सीएम मान ने बताया कि राज्य में 'स्कूल ऑन व्हील' की शुरुआत की गई है। पहली बार सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए विशेष पीली बसें चलाई गई हैं, जिससे रोजाना 15,000 से अधिक बच्चों को सुरक्षित स्कूल आने-जाने की सुविधा मिल रही है। उन्होंने राजनीतिक विरोधियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब अकाली दल को इन बसों के रंग पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
मेगा PTM और हाई-स्पीड इंटरनेट
सरकार की अन्य उपलब्धियों में 'अध्यापक-अभिभावक मिलनी' (Mega PTM) कार्यक्रम की शुरुआत शामिल है, जिससे माता-पिता अपने बच्चों की प्रगति जान सकें। स्कूलों की देखभाल के लिए कैंपस मैनेजर नियुक्त किए गए हैं और सुरक्षा के लिए 1323 सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, पंजाब उन तीन राज्यों में शामिल हो गया है जहां स्कूलों में हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए 20,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
पेपर लीक पर सीएम का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, सीएम भगवंत मान ने भाजपा शासित राज्यों में पेपर लीक के मुद्दे पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि गुजरात, यूपी और मध्य प्रदेश में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आते हैं, जबकि पंजाब में पिछले चार वर्षों में कोई भी पेपर लीक नहीं हुआ है। केवल एक-दो मामूली शिकायतें आई थीं, जिन पर त्वरित कार्रवाई की गई।