पुत्रदा एकादशी: व्रत का महत्व और तिथि
पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व
पापों का नाश और संतान सुख की प्राप्ति
पवित्रा एकादशी का व्रत धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत सावन मास में आता है और इसे पुण्यदायिनी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं और भगवान शिव की कृपा भी प्राप्त होती है।
पवित्रा एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है। आइए जानते हैं इस व्रत की तिथि कब है।
पुत्रदा एकादशी का व्रत कब मनाया जाएगा?
पंचांग के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का आरंभ 23 अगस्त को सूर्योदय के साथ होगा और इसका समापन 24 अगस्त को सुबह 4:19 बजे होगा। एकादशी का व्रत सूर्योदय व्यापन तिथि पर किया जाता है, इसलिए 23 अगस्त को व्रत करना सबसे अच्छा रहेगा।
पूजा का मुहूर्त
- लाभ चौघड़िया: सुबह 9:09 से 10:46 बजे तक।
- अमृत चौघड़िया: सुबह 10:46 से 12:24 बजे तक।
पुत्रदा एकादशी का महत्व
पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, राजा महीजित के पास संतान नहीं थी। ऋषि लोमेश के निर्देश पर पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से उन्हें संतान की प्राप्ति हुई। इसीलिए इस एकादशी का विशेष महत्व है।
साल में दो बार आती है पुत्रदा एकादशी
यह ध्यान देने योग्य है कि पुत्रदा एकादशी साल में दो बार आती है। पहली बार सावन मास में और दूसरी बार पौष मास में। दोनों की कथा और महत्व अलग-अलग हैं। सावन मास की पुत्रदा एकादशी को विशेष पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से पापों का नाश होता है। साथ ही माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा भी करनी चाहिए, जिससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं।