महाकाल मंदिर: उज्जैन का अद्वितीय ज्योतिर्लिंग और इसकी महत्ता
उज्जैन का महाकाल मंदिर, जो स्वयंभू शिवलिंग के रूप में प्रसिद्ध है, समय और मृत्यु से परे होने का प्रतीक है। यह मंदिर दक्षिण दिशा की ओर मुख किए हुए है, जो यमराज की दिशा मानी जाती है। महाकाल के दर्शन से व्यक्ति का भाग्य जागृत होता है। जानें इस मंदिर के इतिहास, मान्यताओं और यहाँ की परंपराओं के बारे में, जो इसे एक अद्वितीय धार्मिक स्थल बनाते हैं।
Feb 20, 2026, 14:23 IST
महाकाल का महत्व
'अकाल मृत्यु वह मरे, जो काम करे चांडाल का, काल भी उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का।' यहाँ काल का अर्थ समय और मृत्यु दोनों है। महाकाल, जो उज्जैन में स्थित हैं, उन लोगों के लिए पूजनीय हैं जो समय और मृत्यु से परे हैं। महाकाल के दर्शन से व्यक्ति का भाग्य जागृत होता है। उज्जैन का महाकाल मंदिर एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जो दक्षिण दिशा की ओर मुख किए हुए है, जो यमराज की दिशा मानी जाती है। भगवान महाकाल का इस दिशा में होना मृत्यु से परे होने का प्रतीक है।
स्वयंभू शिवलिंग
उज्जैन के महाकालेश्वर शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह अपने आप प्रकट हुआ है। मान्यता है कि भगवान शिव ने राक्षस दूषण को समाप्त कर उसकी राख से अपना श्रृंगार किया था। इसी कारण से वह 'महाकाल' कहलाए।
मानक समय रेखा
उज्जैन महाकाल 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहाँ शिवलिंग की स्थापना किसी व्यक्ति द्वारा नहीं की गई है, बल्कि भगवान महाकाल स्वयं एक ज्योति के रूप में स्थापित हुए हैं। उज्जैन को पृथ्वी की नाभि भी कहा जाता है, और प्राचीन काल में यह गणित और विज्ञान का केंद्र था। यहाँ से मानक समय की गणना करने वाली कर्क रेखा गुजरती है।
पुराणों में महाकाल का वर्णन
स्कंदपुराण के अवंती खंड में भगवान महाकाल का उल्लेख मिलता है। कालिदास ने भी मेघदूतम में महाकाल मंदिर का जिक्र किया है। शिवपुराण के अनुसार, नंद से आठ पीढ़ी पहले एक गोप नामक बालक ने महाकाल की प्राण-प्रतिष्ठा की थी।
राजाओं की परंपरा
उज्जैन पृथ्वी के नाभि केंद्र पर स्थित है, और महाकालेश्वर मंदिर यहाँ विराजमान है। इस कारण से इसे सबसे शक्तिशाली मंदिर माना जाता है। यहाँ के असली राजा भगवान महाकाल हैं, इसलिए किसी भी राजा या उच्च पदस्थ व्यक्ति को रात में मंदिर के आसपास रुकने की परंपरा नहीं है।
कहा जाता है कि जो भी महाकाल मंदिर के पास रुकता है, उसका अनिष्ट हो जाता है। उदाहरण के लिए, पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई जब यहाँ रात बिताने आए थे, तो उनकी सरकार गिर गई थी। इसी तरह, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस येदियुरप्पा को भी यहाँ रुकने के बाद अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।