महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दिव्य आयोजन
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का आयोजन
उज्जैन- आषाढ़ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के अवसर पर रविवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित थे।
रविवार की सुबह भगवान वीरभद्र की अनुमति प्राप्त करने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। भस्म आरती और दिव्य शृंगार के बाद जब श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए, तो पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर में घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रों का उच्चारण हो रहा था।
महाकाल मंदिर के पट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत का उपयोग किया गया। पवित्र भस्म अनुष्ठान से पहले बाबा महाकाल को सूर्य, चंद्रमा, त्रिपुंड, नाग और कुंडल से सजाया गया था।
महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती का आयोजन किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने रात भर लाइन में खड़े रहकर इंतजार किया।
जानकारी के अनुसार, पहले महाकाल को शमशान की राख अर्पित की जाती थी, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
बाबा महाकाल की आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है, जिसे देखने के लिए आम जनता से लेकर बड़ी हस्तियां भी आती हैं। इस दौरान मंदिर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाती है।