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मां दुर्गा के मंत्र: जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए शक्तिशाली जाप

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। यह धार्मिक मान्यता है कि माता रानी अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करती हैं। इस लेख में हम मां दुर्गा के शक्तिशाली मंत्रों के बारे में जानेंगे, जो आपके जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद कर सकते हैं। जानें इन मंत्रों का महत्व और कैसे ये आपके जीवन को बदल सकते हैं।
 

मंत्रों के जप से जीवन की सभी बाधाएं हो जाती हैं दूर


Maa Durga Mantras, नई दिल्ली: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दौरान माता रानी अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करती हैं और उनके दुखों को दूर करती हैं। नवरात्रि के समय मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।


कहा जाता है कि इन मंत्रों का जप करने से माता रानी जल्दी प्रसन्न होती हैं। इन मंत्रों के माध्यम से जीवन की सभी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। मां की कृपा प्राप्त करने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए, आइए जानते हैं नवरात्रि के कुछ विशेष मंत्र।


देवी दुर्गा के मंत्र


  • या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,

  • नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

  • या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

  • या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

  • या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

  • या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

  • या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

  • या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

  • सर्वस्वरुपे सवेर्शे सर्वशक्तिमन्विते ।
    भये भ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमो स्तुते ॥

  • हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
    सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो न: सुतानिव ॥

  • शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।
    सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥

  • ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
    दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

  • रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।
    त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

  • देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।
    देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत: ॥

  • जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
    दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तुते ॥

  • सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।
    गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तुते ॥

  • दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
    स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
    दारिर्द्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
    सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥

  • शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
    घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥

  • देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

  • नतेभ्य: सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।
    रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।


विशेष जानकारी

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