योग शिक्षकों की बेरोजगारी: एक गंभीर मुद्दा
योग का महत्व और शिक्षकों की स्थिति
भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों से योग में बीए, एमए और पीजी डिप्लोमा करने वाले छात्रों का कहना है कि उन्हें पढ़ाई के दौरान बताया जाता है कि योग का क्षेत्र बहुत बड़ा है, लेकिन असलियत में सरकारी नौकरियों की संख्या बहुत कम है। स्कूलों में योग शिक्षकों के स्थायी पदों की कमी है, और अधिकांश राज्यों में नियुक्तियां संविदा के आधार पर होती हैं।
हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है, जो भारत की पहल पर शुरू हुआ था। इस दिन को 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है। हालांकि, इस उत्सव के पीछे एक कड़वा सच है - योग शिक्षकों की बेरोजगारी और उनके भविष्य के लिए स्पष्ट सरकारी नीतियों का अभाव।
योग दिवस पर योग के महत्व की चर्चा होती है, लेकिन स्थायी रोजगार और उचित वेतन की कोई योजना नहीं है। 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया, जिसके बाद योग की लोकप्रियता बढ़ी है।
भारत में विश्वविद्यालयों और संस्थानों में योग के विभिन्न पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि उन्हें रोजगार कैसे मिलेगा।
सरकारी कार्यक्रमों में योग प्रशिक्षकों की सेवाएं ली जाती हैं, लेकिन ये अस्थायी होती हैं। कार्यक्रम खत्म होते ही बेरोजगारी की समस्या फिर से सामने आ जाती है।
योग शिक्षकों का कहना है कि एक दिन का योग दिवस मनाने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं होता। योग को केवल उत्सव तक सीमित रखने के बजाय इसे रोजगार और स्वास्थ्य से जोड़ने की आवश्यकता है।
केंद्र और राज्य सरकारों ने योग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन रोजगार सृजन की दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ है। यदि सरकार वास्तव में योग को जन-जन तक पहुंचाना चाहती है, तो नियमित योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए।
प्राइवेट क्षेत्र में योग शिक्षकों के लिए अवसर हैं, लेकिन स्थिति संतोषजनक नहीं है। बड़े शहरों में कुछ संस्थानों में अच्छी आय संभव है, लेकिन छोटे शहरों में पारिश्रमिक बहुत कम है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में योग को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है, लेकिन अधिकांश विद्यालयों में नियमित योग शिक्षक नहीं हैं।
योग शिक्षकों और संगठनों की मांग है कि राष्ट्रीय स्तर पर सेवा नियम बनाए जाएं। इसके अलावा, योग शिक्षकों का वेतनमान और नियुक्ति प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि आयुष मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच बेहतर समन्वय से योग को रोजगार आधारित क्षेत्र बनाया जा सकता है।
हालांकि, विदेशी अवसरों का लाभ वही लोग उठा पाते हैं जिनके पास संसाधन और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र होते हैं।
योग अब केवल स्वास्थ्य अभ्यास नहीं, बल्कि एक बड़ा उद्योग बन चुका है। योग से जुड़े उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन प्रशिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिल रहा।
योग शिक्षकों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं से नहीं होगा। इसके लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता है।
योग दिवस के भव्य आयोजन गर्व का विषय हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि योग शिक्षकों के रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीरता से विचार किया जाए।