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वैशाख पूर्णिमा: महत्व, पूजा विधि और वर्जनाएं

वैशाख पूर्णिमा, जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन विशेष पूजा विधियों का पालन करना और कुछ वर्जनाओं से बचना आवश्यक है। जानें इस दिन क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए, ताकि आप इस पर्व का सही लाभ उठा सकें।
 

वैशाख पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में वैशाख पूर्णिमा का विशेष स्थान है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन स्नान, दान, पूजा और ध्यान करने से कई जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं। इस वर्ष, वैशाख पूर्णिमा का पर्व 01 मई 2026 को मनाया जाएगा।


क्या करें

इस दिन सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो घर के स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।


पूर्णिमा के दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, भगवान सत्यनारायण की कथा का पाठ भी करना लाभकारी होता है, जिससे घर में सुख और शांति बनी रहती है।


वैशाख माह की गर्मी को देखते हुए, इस दिन फल, जल, सत्तू, छाता और ठंडी चीजों का दान करना पुण्य फल प्रदान करता है।


पूर्णिमा की रात चंद्र देव को दूध और जल का अर्घ्य देना चाहिए, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।


क्या न करें

वैशाख पूर्णिमा के दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। तामसिक भोजन से सकारात्मक ऊर्जा में कमी आती है।


इस दिन घर में कलह या बड़े-बुजुर्गों का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे मां लक्ष्मी का वास समाप्त हो जाता है। विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों का सम्मान करना आवश्यक है।


शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि पर नाखून काटना, बाल कटवाना या शेविंग करना वर्जित है, इसे अशुभ माना जाता है।


इस दिन पैसे उधार लेना या देना भी नहीं चाहिए, क्योंकि इससे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।


पूर्णिमा की सुबह और शाम को सोना भी वर्जित है, क्योंकि यह नकारात्मकता और आलस्य को बढ़ाता है।


पूजन मंत्र

ॐ महालक्ष्म्यै नमः, नैवेद्यं निवेदयामि।


नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे चलां कुरु।


ईप्सितं मे वरं देहि परत्र च परां गतिम् ॥


ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नम: