×

सर्वांगपुष्टि आसन: 10 मिनट में शरीर को मजबूत बनाने वाला योगासन

सर्वांगपुष्टि आसन एक प्रभावी योगासन है जो शरीर को मजबूत बनाने और मानसिक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है। इस आसन का नियमित अभ्यास शारीरिक समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है। जानें इसके लाभ, सही तरीके से अभ्यास करने की विधि और किन स्थितियों में इसे नहीं करना चाहिए। 10 मिनट का यह आसन आपके स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है।
 

सर्वांगपुष्टि आसन का महत्व

नई दिल्ली: आजकल की जीवनशैली इतनी अनियमित हो गई है कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि रोजाना 10 से 15 मिनट योगासन का अभ्यास करना चाहिए, जो कई स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में मददगार साबित होता है।


मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा एक प्रभावी आसन, सर्वांगपुष्टि आसन, के बारे में जानकारी देता है। यह आसन पूरे शरीर को मजबूत बनाने में सहायक है और रक्त संचार, मांसपेशियों की ताकत और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है।


आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में, जहां बैठे रहने और तनाव के कारण शारीरिक समस्याएं आम हो गई हैं, सर्वांगपुष्टि आसन बेहद लाभकारी है। यह न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक ऊर्जा को भी बढ़ाता है, जिससे जीवन की चुनौतियों का सामना करना आसान हो जाता है।


इस आसन का नियमित अभ्यास रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है, जिससे कमर और पीठ दर्द में राहत मिलती है। यह शरीर की मांसपेशियों को टोन करता है, खासकर कमर, पेट और पैरों की चर्बी को कम करने में मदद करता है। बेहतर रक्त संचार से त्वचा में निखार आता है और इम्युनिटी भी मजबूत होती है।


सर्वांगपुष्टि आसन के नियमित अभ्यास से मोटापा, कब्ज और शारीरिक कमजोरी में सुधार होता है। यह बच्चों की ऊंचाई बढ़ाने और युवाओं के शारीरिक विकास में भी सहायक है। इसके अलावा, यह जोड़ों की जकड़न को दूर करता है, लचीलापन बढ़ाता है और थकान तथा तनाव को कम करता है।


हालांकि, यह आसन सरल दिखता है, लेकिन इसे सही तरीके से और योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए। गर्दन, पीठ या कंधे में चोट, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, गंभीर हृदय रोग या हाल ही में सर्जरी होने पर इस आसन से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और पीरियड्स के दौरान भी इसे नहीं करना चाहिए। शुरुआत में इसे अधिक समय तक न करें और सांस पर ध्यान दें। यदि चक्कर आए या असुविधा हो, तो तुरंत रुक जाएं। हमेशा खाली पेट या हल्के व्यायाम के बाद इसका अभ्यास करें।