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सुनीता विलियम्स: अंतरिक्ष में प्रतिस्पर्धा और भारत की भूमिका

सुनीता विलियम्स, भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री, ने हाल ही में दिल्ली में एक सेमिनार में अंतरिक्ष की होड़ और भारत की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने चांद पर जाने की इच्छा और अपने अनुभवों के बारे में भी बात की। विलियम्स ने कल्पना चावला के परिवार से मुलाकात की और उनके योगदान को याद किया। जानें उनके अंतरिक्ष में बिताए गए समय और भविष्य की योजनाओं के बारे में।
 

अंतरिक्ष की होड़ में भारत की स्थिति


सुनीता विलियम्स का बयान
भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने कहा है कि वर्तमान में अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक प्रतिस्पर्धा चल रही है। कई देश चांद और अन्य अंतरिक्ष स्थलों पर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल पहले पहुंचना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मानवता सुरक्षित और स्थायी तरीके से चांद पर जा सके।


दिल्ली में सेमिनार में सुनीता का संबोधन

सुनीता विलियम्स ने मंगलवार को दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में 'आंखें सितारों पर, पैर जमीं पर' नामक सेमिनार में भाग लिया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अन्वेषण में सभी देशों को सहयोग करना चाहिए ताकि किसी एक देश का वर्चस्व न हो। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक और पारदर्शी होनी चाहिए, जैसे अंटार्कटिका का मॉडल।


चांद पर जाने की इच्छा

विलियम्स ने मजाक करते हुए कहा कि वह चांद पर जाना चाहती हैं, लेकिन उनके पति उन्हें अनुमति नहीं देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि भारत आना उनके लिए घर वापसी जैसा अनुभव है, क्योंकि उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले से हैं।


कल्पना चावला के परिवार से मुलाकात

सुनीता ने दिवंगत एस्ट्रोनॉट कल्पना चावला की मां और बहन से भी मुलाकात की। उन्होंने चावला की मां को गले लगाया और कहा कि वह उनके परिवार की सदस्य जैसी हैं। चावला की मां ने बताया कि सुनीता और कल्पना एक-दूसरे को अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थीं।


सुनीता का अंतरिक्ष में अनुभव

सुनीता विलियम्स ने हाल ही में नासा से रिटायरमेंट ली है। उन्होंने 27 साल की सेवा के बाद 27 दिसंबर 2025 को रिटायरमेंट की घोषणा की। उनके अंतरिक्ष में बिताए गए 608 दिन और 9 स्पेस वॉक का रिकॉर्ड है, जो किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री के लिए सबसे अधिक है।