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हरियाणा में दस बेटियों के बाद बेटे का जन्म: स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा

हरियाणा के फतेहाबाद में एक परिवार ने दस बेटियों के बाद एक बेटे का स्वागत किया है। यह घटना न केवल खुशी का कारण बनी है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और बेटे की चाहत जैसे गंभीर मुद्दों पर नई बहस को भी जन्म देती है। जानें इस डिलीवरी के पीछे की चुनौतियों और सामाजिक दृष्टिकोण के बारे में।
 

बेटियों के बाद बेटे का आगमन

हरियाणा के फतेहाबाद जिले में एक परिवार ने दस बेटियों के बाद एक बेटे का स्वागत किया है। ग्यारहवें बच्चे की डिलीवरी काफी चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं।


चौंकाने वाला मामला

जींद और फतेहाबाद की सीमा पर स्थित एक गांव में एक 37 वर्षीय महिला ने अपने 11वें बच्चे के रूप में एक बेटे को जन्म दिया है। इस दंपत्ति की पहले से 10 बेटियां हैं। यह घटना खुशी के साथ-साथ महिलाओं के स्वास्थ्य और बेटे की चाहत जैसे गंभीर मुद्दों पर नई बहस को जन्म देती है।


डॉक्टरों की चुनौती

यह डिलीवरी जींद के उचाना कस्बे के एक निजी अस्पताल में हुई। अस्पताल के संचालक डॉ. नरवीर श्योराण ने बताया कि महिला की स्थिति चिकित्सकीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण थी। महिला के शरीर में खून की कमी थी और बार-बार गर्भधारण करने के कारण उसकी सेहत कमजोर हो गई थी।


सुरक्षित प्रसव के लिए खून चढ़ाना

डॉक्टरों ने सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए महिला को तीन यूनिट खून चढ़ाया। नॉर्मल डिलीवरी के जरिए बच्चे का जन्म हुआ और मां-बच्चा दोनों की स्थिति स्थिर है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार गर्भधारण करना महिला के लिए खतरनाक हो सकता है।


पिता का दृष्टिकोण

बच्चे के पिता संजय कुमार, जो एक मजदूर हैं, ने बताया कि परिवार की इच्छा थी कि घर में एक भाई का आगमन हो। उन्होंने कहा कि वे अपनी सभी बेटियों को अच्छी शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं।


महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार मां बनने से हड्डियों की कमजोरी, एनीमिया और गर्भाशय से जुड़ी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। एक सामान्य मजदूर परिवार के लिए इतने बड़े परिवार का पालन-पोषण करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।


हरियाणा में लिंगानुपात

हरियाणा में लिंगानुपात में पिछले कुछ वर्षों में सुधार हुआ है। 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का लिंगानुपात 923 हो गया है, जो 2024 के मुकाबले 13 अंक अधिक है।


सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता

इस तरह की घटनाएं समाज को आईना दिखाती हैं। बेटे की चाहत में मां की जान जोखिम में डालना और आर्थिक स्थिति को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए संकट पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि छोटे परिवार के फायदों और महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक काउंसलिंग की आवश्यकता है।