1971 में भारत की ऐतिहासिक टेस्ट जीत: इंग्लैंड के खिलाफ यादगार पल
1971 का इंग्लैंड दौरा
यह कहानी 1971 की है, जब भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड के दौरे पर थी, जिसमें तीन टेस्ट मैच खेले जाने थे। अजीत वाडेकर की कप्तानी में टीम ने हाल ही में वेस्टइंडीज को उनके घर में हराया था, जो उस समय एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। अब भारत को इंग्लैंड के खिलाफ उनकी धरती पर चुनौती का सामना करना था, जबकि भारत ने इंग्लैंड में एक भी टेस्ट मैच नहीं जीता था।
भारत की चुनौती
भारतीय टीम ने इंग्लैंड में 19 टेस्ट मैच खेले थे, जिनमें से 15 में उसे हार का सामना करना पड़ा था, जबकि 4 मैच ड्रॉ रहे थे। इनमें से 2 ड्रॉ बारिश के कारण रद्द हुए थे। इंग्लैंड पहुंचने से पहले भारत को पिछले 12 टेस्ट में से 11 में हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में यह दौरा बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन वाडेकर की टीम ने पहले टेस्ट में सकारात्मक सोच के साथ कदम रखा।
लॉर्ड्स और मैनचेस्टर में ड्रॉ
लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड ने पहली पारी में 304 रन बनाए, जबकि भारत ने 313 रन बनाकर 9 रन की बढ़त हासिल की। दूसरी पारी में भारतीय गेंदबाजों ने कमाल दिखाया और इंग्लैंड को 191 रन पर समेट दिया। भारत को जीत के लिए 183 रन का लक्ष्य मिला, लेकिन बारिश के कारण मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ। मैनचेस्टर में भी भारत को 420 रन का लक्ष्य मिला, लेकिन बारिश ने फिर से मैच को ड्रॉ कर दिया।
ओवल में निर्णायक टेस्ट
तीसरा और अंतिम टेस्ट ओवल में खेला गया, जहां इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 355 रन बनाए। भारत ने जवाब में 284 रन बनाए। दूसरी पारी में भागवत चंद्रशेखर ने इंग्लैंड को 101 रन पर समेट दिया। भारत को 173 रन का लक्ष्य मिला। अंतिम दिन, गणेश चतुर्थी के अवसर पर, भारतीय फैंस ने एक हथिनी को मैदान पर लाकर शुभ संकेत माना।
भारतीय फैंस की यादगार जीत
भारत को जीत के लिए 100 से कम रन बनाने थे। कप्तान वाडेकर पहले ही गेंद पर आउट हो गए, लेकिन सरदेसाई और विश्वनाथ ने धैर्य दिखाया। अंततः आबिद अली के चौके के साथ भारत ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। इस जीत ने भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा दी और फैंस ने इसे हमेशा याद रखा।