BCCI की नई नीति: विदेशी लीग में खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए रिटायरमेंट नियम
BCCI की नई पहल
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अब उन क्रिकेटरों पर नजर रखने की योजना बना रहा है जो जल्दी रिटायरमेंट लेकर विदेशी लीग में खेलने का विकल्प चुन रहे हैं। हाल के दिनों में कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से संन्यास लिया है, जिससे यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में विजय शंकर ने 35 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट लिया और अब वह लंका प्रीमियर लीग (LPL) में खेलने के लिए उपलब्ध हैं, जहां उन्हें कैंडी रॉयल्स ने साइन किया है.
केएस भरत का रिटायरमेंट
विजय शंकर के बाद, विकेटकीपर बल्लेबाज केएस भरत ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। भरत ने टीम इंडिया के लिए 7 टेस्ट मैच खेले हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह घरेलू क्रिकेट में कब तक खेलेंगे। लगातार आ रहे रिटायरमेंट के चलते BCCI अब सजग हो गया है और एक नई रिटायरमेंट नीति लाने की योजना बना रहा है.
BCCI की संभावित नीति
विदेशी लीग में खेलने के लिए जल्दी रिटायरमेंट लेने वाले खिलाड़ियों पर नियंत्रण लगाने के लिए, BCCI ने गुरुवार शाम को एपेक्स काउंसिल की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। यह बैठक ऑनलाइन आयोजित की गई थी, और इस पर अंतिम निर्णय BCCI के अध्यक्ष और सचिव पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड विदेशी लीग में खेलने के बाद किसी खिलाड़ी के भारतीय क्रिकेट में वापसी के लिए कम से कम 5 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने पर विचार कर रहा है.
क्या बदलाव आएंगे?
BCCI किसी भी सक्रिय भारतीय खिलाड़ी को विदेशी लीग में भाग लेने की अनुमति नहीं देता। यदि खिलाड़ियों को खेलना है, तो उन्हें पहले अंतरराष्ट्रीय और भारतीय क्रिकेट से संन्यास लेना होगा। विजय शंकर के अलावा, दिनेश कार्तिक, पीयूष चावला और आर अश्विन जैसे कई प्रमुख खिलाड़ी इस रास्ते को अपना चुके हैं। इस बढ़ते ट्रेंड को देखते हुए BCCI चिंतित है और 5 साल के कूलिंग-ऑफ पीरियड नीति को लागू करने पर विचार कर रहा है। यदि यह नीति लागू होती है, तो विदेशी लीग में खेलने वाले खिलाड़ियों को BCCI की ब्रॉडकास्टिंग और कोचिंग से 5 साल तक वंचित रखा जा सकता है.