1981 में भारत की ऐतिहासिक टेस्ट जीत: कपिल देव का अद्वितीय साहस
मेलबर्न में ऐतिहासिक मुकाबला
11 फरवरी 1981 की सुबह मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) दर्शकों से भरा हुआ था। ऑस्ट्रेलियाई टीम 143 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 24/3 के स्कोर पर थी। दर्शकों में उत्सुकता थी कि क्या भारत कोई चमत्कार करेगा जिससे सीरीज ड्रॉ हो सके या ऑस्ट्रेलिया एक और आसान जीत हासिल करेगा। इसका उत्तर अगले कुछ घंटों में मिलने वाला था।
भारत की पिछली हारों का दबाव
भारत ने सिडनी में पहले टेस्ट में पारी के अंतर से हार का सामना किया था। दूसरे टेस्ट में भी टीम हारने के कगार पर थी। ऐसे में तीसरे टेस्ट में सब कुछ दांव पर था। उस समय विदेशी धरती पर जीत हासिल करना भारत के लिए एक चुनौती थी। लेकिन 1981 की उस दोपहर भारतीय टीम ने एक ऐसा कारनामा किया, जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है।
दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी
1970 के दशक के अंत और 1980 के शुरुआती वर्षों में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट अपनी आक्रामकता के लिए जाना जाता था। डेनिस लिली और लेन पास्को जैसे तेज गेंदबाज बल्लेबाजों पर कहर बरपाते थे। वहीं, भारत की टीम में सुनील गावस्कर, चेतन चौहान, दिलीप वेंगसरकर, गुंडप्पा विश्वनाथ, संदीप पाटिल, यशपाल शर्मा और कपिल देव जैसे दिग्गज शामिल थे।
ऑस्ट्रेलिया की मजबूत शुरुआत
ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का निर्णय लिया और पहले दिन भारत को समेट दिया। गुंडप्पा विश्वनाथ (114) के शतक के बावजूद भारत 237 रन ही बना सका। ऑस्ट्रेलिया ने एलन बॉर्डर (124) और ग्रेग चैपल (76) के योगदान से 419 रन बनाए, जिससे उसे 182 रन की बढ़त मिली।
गावस्कर का विवादास्पद आउट
भारत ने दूसरी पारी में अच्छी शुरुआत की और तीसरे दिन स्टंप्स तक 108 रन बना लिए। गावस्कर 59 रन पर नाबाद थे, लेकिन एक विवादास्पद LBW निर्णय के कारण उनका विकेट गिर गया। इस घटना ने मैच का रुख बदल दिया।
भारत की पारी का संघर्ष
भारत ने 324 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया के सामने 143 रन का लक्ष्य रखा। हालांकि, भारत की गेंदबाजी में कपिल देव और अन्य गेंदबाजों की चोटों ने चिंता बढ़ा दी। लेकिन करसन घावरी ने दो विकेट लेकर खेल में जान डाल दी।
कपिल देव का अद्वितीय साहस
कपिल देव ने दर्द के बावजूद गेंदबाजी की और ऑस्ट्रेलिया को 83 रन पर ढेर कर दिया। उन्होंने 28 रन देकर 5 विकेट लिए, जो क्रिकेट इतिहास में एक साहसी प्रदर्शन के रूप में याद किया जाता है।
कपिल देव की जीत का जज्बा
कपिल देव की इस जीत ने भारत को सीरीज में बराबरी दिलाई। यह पहला मौका था जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज को ड्रॉ कराया। इस मैच को 45 साल हो चुके हैं, लेकिन मेलबर्न 1981 की जीत आज भी गर्व के साथ याद की जाती है।