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अनाहत सिंह का स्क्वैश में अद्वितीय सफर: अमेरिका में मिली सफलता

अनाहत सिंह, एक युवा भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी, ने अमेरिका में सिलिकॉन वैली ओपन में अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा है। उन्होंने 8 बार की विश्व चैंपियन नूर एल शेरबिनी को हराकर एक बड़ा उलटफेर किया। अनाहत ने एशियन गेम्स में भी भारत को सिल्वर मेडल दिलाया और कई अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते हैं। हालांकि, स्क्वैश को भारत में अभी भी व्यापक पहचान नहीं मिली है। जानें उनके सफर और स्क्वैश के भविष्य के बारे में इस लेख में।
 

अनाहत सिंह की अद्भुत उपलब्धियां

भारत की युवा स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने अमेरिका के रेडवुड सिटी में आयोजित सिलिकॉन वैली ओपन में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, वह सेमीफाइनल में हार गईं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। अनाहत ने 8 बार की विश्व चैंपियन नूर एल शेरबिनी को हराकर एक बड़ा उलटफेर किया, जिससे स्क्वैश के प्रति लोगों का ध्यान खींचा गया।


इसके बाद, उन्होंने मिस्र की सलमा हानी को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई, जो उनके लिए एक नया मील का पत्थर था। 18 वर्षीय अनाहत पहली बार PSA गोल्ड लेवल टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहीं। वर्ल्ड रैंकिंग में 14वें स्थान पर रहने वाली अनाहत का सफर मलयेशिया की शिवसांगरी सुब्रमण्यम ने रोक दिया, जिन्होंने उन्हें 3-1 से हराया। अनाहत ने पहला सेट जीतने के बाद भी सुब्रमण्यम ने शानदार वापसी की और मुकाबला 5-11, 11-6, 11-4, 11-7 से जीत लिया।


अनाहत का एशियन गेम्स में प्रदर्शन

अनाहत, जो 8 साल की उम्र से स्क्वैश खेल रही हैं, ने हाल ही में एशियन गेम्स में भारत को सिल्वर मेडल दिलाया। वह एशियाड के स्क्वैश सिंगल्स फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। हालांकि, उन्हें वहां भी सुब्रमण्यम के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले, उन्होंने 2023 में हांगझोऊ एशियन गेम्स में महिला टीम और मिक्स्ड डबल्स स्पर्धा में 2 ब्रॉन्ज मेडल जीते थे।


इस वर्ष, अनाहत ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप में गर्ल्स सिंगल्स का खिताब जीता, जिससे वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय बनीं। उन्होंने इस इवेंट में मिस्र के 15 साल के दबदबे को समाप्त किया। इसके अलावा, वह स्क्वैश वर्ल्ड कप में भी चैंपियन रह चुकी हैं और 2023, 2024 और 2025 में राष्ट्रीय चैंपियन बनने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार खिताब जीत रही हैं।


भारत में स्क्वैश का भविष्य

भारत ने स्क्वैश में कई अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हासिल की हैं, और अनाहत भी इस खेल को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। फिर भी, यह खेल क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन और टेनिस की तरह आम लोगों के बीच पहचान नहीं बना पाया है। इसका मुख्य कारण यह है कि स्क्वैश एक शहरी खेल है, जिसे आमतौर पर संपन्न वर्ग के लोग ही खेलते हैं।


अनाहत के पिता गुरशरण सिंह एक वकील हैं, जबकि उनकी मां तानी वदेहरा सिंह एक इंटीरियर डिजाइनर हैं। उनकी बड़ी बहन अमीरा भी स्क्वैश खिलाड़ी हैं। अनाहत की पढ़ाई हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हो रही है, जहां वह भारत की शीर्ष अंडर-19 खिलाड़ियों में से एक थीं।


स्क्वैश के लिए विशेष कोर्ट की आवश्यकता होती है, जिसके कारण यह खेल गांवों तक नहीं पहुंच पाया है। इसके अलावा, स्क्वैश को मीडिया में पर्याप्त कवरेज नहीं मिलती, जिससे कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होने के बावजूद अनजान बने रहते हैं। स्क्वैश में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इसकी पहुंच आम लोगों तक सीमित है।