IPL के दौरान बड़ा साइबर क्राइम, पूर्व क्रिकेटर की गिरफ्तारी
क्रिकेट जगत में हड़कंप
IPL के उत्साह के बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसने क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया है। इस बार एक पूर्व रणजी क्रिकेटर का नाम एक गंभीर साइबर क्राइम मामले में आया है।
गुजरात से मुंबई की साइबर क्राइम पुलिस ने एक बड़े 'डिजिटल अरेस्ट स्कैम' का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें ऋषि तुषार अरोट का नाम भी शामिल है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे अपराधी तकनीक का उपयोग कर लोगों को धोखा दे रहे हैं।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम का विवरण
पुलिस के अनुसार, यह घटना 11 फरवरी को हुई, जब मुंबई की आरे कॉलोनी में एक बुजुर्ग महिला को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को चेन्नई पुलिस का अधिकारी बताया और कहा कि उनके सिम कार्ड का उपयोग एक आतंकवादी ने किया है। इस झूठे आरोप ने महिला को भयभीत कर दिया और यहीं से ठगी का खेल शुरू हुआ। कॉल को विभिन्न लोगों तक ट्रांसफर किया गया, जिन्होंने खुद को पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताया।
डर और दबाव के जरिए ठगी
इसके बाद महिला को लगातार डराया गया कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज हो सकता है। आरोपियों ने खुद को मुंबई एटीएस से जोड़ा और कहा कि उनके परिवार की हर जानकारी उनके पास है। महिला को यह यकीन दिलाया गया कि अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए उन्हें पैसे ट्रांसफर करने होंगे। ठगों ने कहा कि पैसे केवल वेरिफिकेशन के लिए लिए जा रहे हैं और बाद में वापस कर दिए जाएंगे।
तकनीक का चालाकी से इस्तेमाल
इस स्कैम में तकनीक का इस्तेमाल बेहद चालाकी से किया गया। महिला को वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति दिखाया गया जिसने पुलिस की वर्दी पहनी हुई थी। इससे महिला को विश्वास हो गया कि वह वास्तव में कोई अधिकारी है। इसके अलावा, उसे घर का पूरा वीडियो दिखाने के लिए कहा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह अकेली है। इसके साथ ही 'Arattai' ऐप डाउनलोड करवाकर उसकी प्राइवेसी सेटिंग्स बदली गईं और नकली दस्तावेज भेजे गए।
गिरफ्तारियां और जांच का विस्तार
इस मामले में पुलिस ने कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें हाल ही में पकड़े गए तीन आरोपी ऋषि, हर्ष और निखिल शामिल हैं। जांच में पता चला है कि ये लोग ठगी से मिले पैसों को मुख्य सरगनाओं तक पहुंचाने का काम करते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि कैसे पढ़े-लिखे और आम लोग भी इस तरह के साइबर फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं, खासकर बुजुर्ग नागरिक जिन्हें आसानी से डराया जा सकता है।