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कुमकुम मोहोद ने एशियन गेम्स 2026 में रचा इतिहास, बनीं पहली भारतीय महिला तीरंदाज जो जीती गोल्ड

कुमकुम मोहोद ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की रिकर्व इंडिविजुअल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। वह इस इवेंट में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला तीरंदाज बनीं। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने भारत के लिए कुल 17 स्वर्ण पदक और 77 पदकों की संख्या को सुनिश्चित किया। जानें कुमकुम की यात्रा, उनके मुकाबले और इस उपलब्धि का महत्व।
 

भारत की शानदार शुरुआत एशियन गेम्स 2026 में


नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 के अंतिम दिन भारत ने एक अद्भुत उपलब्धि हासिल की है। युवा तीरंदाज कुमकुम मोहोद ने महिलाओं की रिकर्व इंडिविजुअल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस इवेंट में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला तीरंदाज बन गई हैं। कुमकुम की इस जीत के साथ भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या 17 हो गई, और कुल पदकों की संख्या 77 तक पहुंच गई है।


शूटऑफ में दक्षिण कोरियाई प्रतिद्वंद्वी को हराया

कुमकुम और दक्षिण कोरिया की ओह येजिन के बीच फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। निर्धारित राउंड में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद निर्णय शूटऑफ में हुआ। यहां कुमकुम ने बेहतरीन निशाना लगाते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया और भारत के लिए एक और स्वर्ण पदक जोड़ा।


फाइनल तक पहुंचने का कुमकुम का सफर भी विशेष रहा। सेमीफाइनल में उन्होंने चीन की झू जिंगयी को 6-2 से हराया। इससे पहले क्वार्टर फाइनल में भारतीय तीरंदाज ने एक बड़ा उलटफेर करते हुए दक्षिण कोरिया की मौजूदा विश्व चैंपियन और ओलंपिक चैंपियन कांग चेयॉन्ग को 6-4 से मात दी थी।


टीम इवेंट में भी मिली थी सफलता

कुमकुम ने इस एशियन गेम्स में पहले भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा के साथ मिलकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद धीरज बोम्मदेवरा के साथ मिश्रित टीम स्पर्धा में उन्हें रजत पदक मिला। कुमकुम की इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि फाइनल में पहुंचने के साथ उन्होंने लॉस एंजेलेस 2028 ओलंपिक के लिए देश का कोटा हासिल किया। सेमीफाइनल में झू जिंगयी के खिलाफ उन्होंने 28-27, 30-30, 29-29 और 29-28 के सेट स्कोर के साथ जीत दर्ज की थी।


एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर कुमकुम ने भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में अपना नाम अमर कर दिया है। उनकी इस उपलब्धि ने भारत के लिए प्रतियोगिता के अंतिम दिन को यादगार बना दिया।