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आकाश चोपड़ा ने पहले वनडे के बाद चयनकर्ताओं पर उठाए सवाल

पहले वनडे में भारत की जीत के बावजूद, आकाश चोपड़ा ने टीम चयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नीतीश कुमार रेड्डी को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने के निर्णय की आलोचना की और कहा कि यदि किसी खिलाड़ी को खेलने का मौका नहीं दिया जाना है, तो उसे टीम में शामिल करने का कोई अर्थ नहीं है। चोपड़ा ने चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के बीच तालमेल की कमी पर भी चिंता जताई। आगे जानें कि उन्होंने क्या सुझाव दिए और रेड्डी के भविष्य को लेकर उनकी क्या राय है।
 

आकाश चोपड़ा की प्रतिक्रिया


भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहले वनडे में भारतीय टीम ने चार विकेट से जीत हासिल की, लेकिन इस जीत के बावजूद टीम चयन पर चर्चा तेज हो गई है। विशेष रूप से, सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने के निर्णय पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी खिलाड़ी को खेलने का मौका नहीं दिया जाना है, तो उसे टीम में शामिल करने का कोई मतलब नहीं है।


टीम चयन पर उठे सवाल

आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के बीच समन्वय की कमी स्पष्ट है। उन्होंने यह भी बताया कि जब टीम में तीन तेज गेंदबाज थे, तब भी नीतीश कुमार रेड्डी को मौका नहीं दिया गया। चोपड़ा ने सुझाव दिया कि यदि प्रबंधन पहले से जानता था कि रेड्डी को नहीं खिलाया जाएगा, तो उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलने दिया जाना चाहिए था।


रेड्डी के भविष्य पर चिंता

नीतीश कुमार रेड्डी को हार्दिक पांड्या के बैकअप के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन लगातार मौके न मिलने से उनका विकास प्रभावित हो सकता है। आकाश चोपड़ा ने कहा कि किसी खिलाड़ी को तैयार करने के लिए उसे खेल में शामिल करना आवश्यक है। बेंच पर बैठने से न तो अनुभव मिलता है और न ही आत्मविश्वास।


क्या रेड्डी को खिलाने से भारत हार जाता?

चोपड़ा ने सवाल किया कि क्या नीतीश कुमार रेड्डी को खिलाने से भारत यह मैच हार जाता। उन्होंने न्यूजीलैंड टीम के अनुभव की कमी की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारतीय टीम इस मुकाबले में अधिक मजबूत थी।


आगे के मैचों में मिल सकता है मौका

पहले वनडे में वाशिंगटन सुंदर को साइड स्ट्रेन की समस्या के कारण परेशानी हुई थी। यदि वह अगले मैचों के लिए फिट नहीं होते हैं, तो नीतीश कुमार रेड्डी को अंतिम दो वनडे में खेलने का मौका मिल सकता है। आकाश चोपड़ा का मानना है कि ऐसे हालात में टीम प्रबंधन को साहसिक निर्णय लेना चाहिए और युवा खिलाड़ियों को मौका देकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना चाहिए।