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आर प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस 2026 में ऐतिहासिक जीत दर्ज की

आर प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। वह इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय बने हैं। फाइनल में जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराने के बाद, प्रज्ञानानंदा ने विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को दो बार मात दी। ग्रैंडमास्टर प्रवीण थिप्से ने उन्हें कार्लसन से भी अधिक खतरनाक खिलाड़ी बताया। जानें प्रज्ञानानंदा की सफलता और उनकी खेल शैली में आए बदलाव के बारे में।
 

प्रज्ञानानंदा की ऐतिहासिक जीत

भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा ने 5 जून को नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतकर एक नया इतिहास रच दिया। वह इस टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने हैं। 20 वर्षीय प्रज्ञानानंदा ने फाइनल में जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर यह उपलब्धि हासिल की। टूर्नामेंट की शुरुआत में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं था, लेकिन बाद में उन्होंने शानदार वापसी की। इस दौरान, उन्होंने विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को दो बार मात दी।


प्रज्ञानानंदा का कार्लसन के खिलाफ रिकॉर्ड

प्रज्ञानानंदा भारत के दूसरे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार हराया। इससे पहले, 2007 में विश्वनाथन आनंद ने लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट में कार्लसन को लगातार दो बार हराया था। प्रज्ञानानंदा की इस सफलता के बाद, ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल करने वाले पहले भारतीय प्रवीण थिप्से ने एक बड़ा बयान दिया है। थिप्से ने प्रज्ञानानंदा को कार्लसन से भी अधिक खतरनाक खिलाड़ी बताया।


प्रज्ञानानंदा की तुलना अन्य खिलाड़ियों से

द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित ग्रैंडमास्टर थिप्से का मानना है कि प्रज्ञानानंदा भारत के सबसे मजबूत चेस खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वह वर्ल्ड चैंपियन डी गुकेश और अर्जुन एरिगैसी से भी आगे हैं। थिप्से ने मीडिया से कहा, 'प्रज्ञानानंदा इस समय बेस्ट भारतीय चेस खिलाड़ी हैं। उनकी मौजूदा फॉर्म को देखते हुए, उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक प्रतिद्वंद्वियों में से एक माना जा सकता है। मैं उन्हें कार्लसन से भी अधिक खतरनाक मानता हूं।'


प्रज्ञानानंदा की वापसी की सराहना

थिप्से ने प्रज्ञानानंदा की नॉर्वे चेस में मिली जीत को हाल के वर्षों में किसी भारतीय खिलाड़ी द्वारा हासिल की गई बेहतरीन उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा, 'प्रज्ञानानंदा ने शानदार वापसी की है। पिछले साल उनका प्रदर्शन अपेक्षित नहीं था, लेकिन अब उन्होंने असाधारण खेल दिखाया है। भारतीय चेस को ऐसे प्रदर्शन की आवश्यकता थी।' थिप्से ने यह भी कहा कि कुछ साल पहले तक प्रज्ञानानंदा अधिक आक्रामक खेलते थे, लेकिन अब उन्होंने अपने विरोधियों की चालों को कुंद करना सीख लिया है।