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एशियन गेम्स 2026 में भारतीय टीम को मिली बड़ी चुनौती

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय जिम्नास्ट प्रणति नायक और उनके कोच अशोक मिश्रा को एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा। उन्हें गलती से एक ही कमरे में रखा गया, जिसके बाद अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। जानें कैसे इस समस्या का समाधान किया गया और कोच को किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
 

एशियन गेम्स 2026: एक अनपेक्षित समस्या

एशियन गेम्स 2026: जापान के नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 के दौरान भारतीय टीम को एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा। भारतीय महिला जिम्नास्ट प्रणति नायक और उनके कोच अशोक मिश्रा को खेल गांव के रूप में उपयोग किए जा रहे क्रूज शिप में गलती से एक ही कमरे में रखा गया।

लगभग 30 घंटे की लंबी उड़ान के बाद, दोनों आधी रात को नागोया पहुंचे। वहां पहुंचने पर जब उन्हें कमरे की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत इस व्यवस्था पर आपत्ति की और अलग कमरों की मांग की।


अधिकारियों ने रात में किया हस्तक्षेप

अधिकारियों ने रात में किया हस्तक्षेप:

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने स्थानीय आयोजन समिति से संपर्क किया और रात में ही समस्या का समाधान करने का प्रयास किया। इसके परिणामस्वरूप, प्रणति नायक के लिए एक अलग कमरा उपलब्ध कराया गया, जबकि कोच अशोक मिश्रा को भारोत्तोलन टीम के मुख्य कोच विजय शर्मा के साथ साझा कमरा दिया गया। इस प्रकार, देर रात के बाद दोनों की रहने की समस्या का समाधान हो गया।


कोच को हुई कठिनाई

कोच को करीब 45 मिनट बाहर बैठना पड़ा:

कमरे की समस्या के अलावा, कोच अशोक मिश्रा को क्रूज शिप में प्रवेश के समय भी कठिनाई का सामना करना पड़ा। जब वह क्रूज शिप के प्रवेश द्वार पर पहुंचे, तो वहां मौजूद पर्ची में उनका नाम था। लेकिन स्वागत कक्ष में कर्मचारियों ने उनका नाम रिकॉर्ड में नहीं पाया, जिसके कारण उन्हें लगभग 45 मिनट तक बाहर बैठना पड़ा।


गलत स्पेलिंग से उत्पन्न समस्या

नाम की गलत स्पेलिंग से हुई परेशानी:

बाद में जांच करने पर पता चला कि उनके नाम को रिकॉर्ड में MISHRA के बजाय MSHRA के रूप में दर्ज किया गया था। एक अक्षर की कमी के कारण कर्मचारी उनके रिकॉर्ड को खोज नहीं पा रहे थे। जब यह गलती सामने आई, तो आईओए के अधिकारियों ने स्थानीय आयोजन समिति से संपर्क किया और रात 1:30 से 2 बजे के बीच इस समस्या का समाधान किया, जिससे कोच को अंदर जाने की अनुमति मिली।