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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: मुरली श्रीशंकर ने लॉन्ग जम्प में फाइनल में जगह बनाई

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए एक अच्छी खबर आई है। मुरली श्रीशंकर ने अपनी पहली ही छलांग में फाइनल में जगह बनाई, जबकि लोकेश सत्यनाथन ने भी शानदार प्रदर्शन किया। अब सभी की नजरें 29 जुलाई को होने वाले फाइनल पर हैं, जहां श्रीशंकर को जमैका के ताजे गेल से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा। जानें मुरली की चोट से वापसी और उनके गोल्ड मेडल की उम्मीदों के बारे में।
 

भारत के लिए एथलेटिक्स में अच्छी खबर


कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के एथलेटिक्स टीम के लिए एक सकारात्मक समाचार आया है। प्रसिद्ध लॉन्ग जम्पर मुरली श्रीशंकर ने अपनी पहली कोशिश में ही फाइनल में प्रवेश कर लिया। उनके साथी लोकेश सत्यनाथन ने भी अंतिम दौर में जगह बनाकर भारत की मेडल की उम्मीदों को और मजबूत किया।


पहली छलांग में फाइनल का टिकट

ग्लासगो में क्वालिफाइंग राउंड के दौरान, मुरली श्रीशंकर ने अपनी पहली छलांग में 8.01 मीटर की दूरी तय की। फाइनल में सीधे पहुंचने के लिए 8.00 मीटर का मानक निर्धारित था, जिसे उन्होंने आसानी से पार कर लिया। इसके बाद उन्होंने अन्य प्रयास नहीं किए और अपनी ऊर्जा फाइनल के लिए बचा ली। उस दिन भारत को 100 मीटर स्प्रिंट में निराशा का सामना करना पड़ा, लेकिन श्रीशंकर ने अपनी छलांग से भारतीय एथलेटिक्स को नई उम्मीद दी। लोकेश सत्यनाथन ने भी 7.77 मीटर की छलांग लगाकर फाइनल में जगह बनाई। अब दोनों खिलाड़ी मेडल के लिए चुनौती पेश करेंगे।


फाइनल में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना

अब सभी की नजरें 29 जुलाई को होने वाले लॉन्ग जम्प फाइनल पर हैं। श्रीशंकर के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमैका के ताजे गेल होंगे, जिन्होंने क्वालिफाइंग में 8.10 मीटर की छलांग लगाई। उनका इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 8.37 मीटर रहा है। वहीं, सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडाइन्स के उरॉय रयान ने 8.04 मीटर की छलांग लगाकर अपनी ताकत दिखाई। दूसरी ओर, लोकेश सत्यनाथन का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 8.21 मीटर है और उनसे भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। भारत चाहेगा कि दोनों खिलाड़ी फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ दें और देश के लिए मेडल जीतकर लौटें।


चोट से वापसी कर बने दावेदार

मुरली श्रीशंकर का यह प्रदर्शन विशेष है क्योंकि उन्होंने कठिन दौर के बाद शानदार वापसी की है। 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2023 एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के बाद, वह पेरिस ओलंपिक की तैयारी कर रहे थे। घुटने की गंभीर चोट के कारण उन्हें लंबे समय तक खेल से दूर रहना पड़ा और ओलंपिक का सपना अधूरा रह गया। कई महीनों की सर्जरी और रिहैब के बाद, उन्होंने खुद को फिर से तैयार किया। अब ग्लासगो में पहली ही छलांग में फाइनल में पहुंचकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह पूरी तरह फिट हैं। इस सीजन में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 8.38 मीटर है, और इसी कारण उन्हें गोल्ड मेडल का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।