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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुरली श्रीशंकर की तैयारी और आत्मविश्वास

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए भारतीय एथलीट मुरली श्रीशंकर ने अपनी तैयारियों और आत्मविश्वास के बारे में चर्चा की है। उन्होंने सर्जरी के बाद शानदार वापसी की है और बर्मिंघम 2022 में जीते रजत पदक को स्वर्ण में बदलने का लक्ष्य रखा है। जानें उनकी उपलब्धियों और आगामी प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन की उम्मीदें।
 

भारत के एथलीटों की तैयारी


23 जुलाई से शुरू होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय खिलाड़ी पूरी तरह से तैयार हैं। आत्मविश्वास से भरे हुए, ये एथलीट इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उत्सुक हैं। इनमें से एक प्रमुख नाम मुरली श्रीशंकर का है, जो लंबी कूद के क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।


मुरली श्रीशंकर का बयान

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों से पहले, 27 वर्षीय मुरली ने अपनी तैयारियों के बारे में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि सर्जरी के बाद उनकी वापसी के बावजूद, उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी आना बाकी है। इस सीजन में उन्होंने अपनी क्षमता को साबित किया है और अब उनका लक्ष्य बर्मिंघम 2022 में जीते रजत पदक को स्वर्ण में बदलना है।


चोट के बाद की वापसी

मुरली ने 2024 में सर्जरी के बाद इस सीजन में शानदार वापसी की है। भुवनेश्वर में आयोजित अंतर राज्यीय चैंपियनशिप में उन्होंने 8.38 मीटर की छलांग लगाकर अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को बराबर किया। हालांकि, उनका मानना है कि वे अपनी पूरी क्षमता अभी तक नहीं दिखा पाए हैं और एक बड़ी छलांग की उम्मीद कर रहे हैं।


आत्मविश्वास और प्रदर्शन में सुधार

श्रीशंकर ने कहा, 'मेरी शारीरिक स्थिति चोट से पहले जैसी हो गई है, या उससे भी बेहतर। मेरी गति और कूदने की क्षमता में सुधार हुआ है। अब सब कुछ एक साथ जोड़ने की आवश्यकता है।' उनका मानना है कि तकनीक, फिटनेस और सही समय पर प्रदर्शन को मिलाकर वे बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।


भारतीय लंबी कूद में प्रतिस्पर्धा

भारतीय पुरुष लंबी कूद में कई खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। श्रीशंकर ने बताया कि अब आठ मीटर की दूरी पार करना सामान्य हो गया है। अंतर राज्यीय चैंपियनशिप में कई भारतीय एथलीटों ने 8.20 मीटर और 8.30 मीटर से अधिक की छलांग लगाई है, जिससे घरेलू प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊँचा हो गया है।


ग्लासगो में स्वर्ण पदक की उम्मीद

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में श्रीशंकर की नजर गोल्ड मेडल पर है। उन्होंने कहा कि बर्मिंघम में 8.08 मीटर की छलांग के साथ उन्होंने सिल्वर जीता था, लेकिन इस बार वे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं।


पोलैंड में प्रशिक्षण ने उन्हें ट्रैक और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार खुद को तैयार करने में मदद की है। वे अपनी प्रक्रिया पर बिना किसी सीमा के भरोसा कर रहे हैं।