फीफा विश्व कप 2026: नए प्रारूप में उलटफेर और चुनौतियाँ
फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत
नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 के आगाज से पहले, टूर्नामेंट के नए 48 टीमों के प्रारूप पर काफी चर्चा हुई। कई विशेषज्ञों का मानना था कि इससे प्रतियोगिता का स्तर घट सकता है और बड़ी टीमों के लिए आगे बढ़ना आसान हो जाएगा। लेकिन नॉकआउट स्टेज के प्रारंभिक मैचों ने इस धारणा को बदल दिया है। अब हर टीम चुनौती पेश कर रही है, और बड़े नाम भी संकट में हैं।
ब्राजील को मिली कठिनाई
पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील को जापान के खिलाफ अपेक्षा से कहीं अधिक कठिन मुकाबला करना पड़ा। जापान ने शुरुआती बढ़त बनाई और ब्राजील पर लगातार दबाव बनाए रखा। कैसेमिरो ने स्कोर बराबर किया, लेकिन निर्णायक गोल अंतिम क्षणों में आया। गैब्रियल मार्टिनेली के 95वें मिनट में किए गए गोल ने ब्राजील को राहत दी और टीम अगले दौर में पहुंच सकी। इस प्रकार, चैंपियन को भी टूर्नामेंट में बने रहने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
जर्मनी की अप्रत्याशित विदाई
ग्रुप स्टेज में शानदार प्रदर्शन करने वाली जर्मनी की टीम नॉकआउट में पराग्वे के खिलाफ टिक नहीं सकी। निर्धारित समय तक मुकाबला बराबरी पर रहा, जिसके बाद पेनल्टी शूटआउट में फैसला हुआ। पराग्वे ने संयम बनाए रखते हुए जीत हासिल की और चार बार की विश्व चैंपियन टीम को बाहर कर दिया। जर्मनी इस हार से बिल्कुल खुश नहीं होगी।
मोरक्को की शानदार वापसी
मोरक्को ने एक बार फिर साबित किया कि उसकी पिछली सफलताएं संयोग नहीं थीं। मोरक्को बनाम नीदरलैंड्स मैच में नीदरलैंड्स ने पहले बढ़त बनाई, लेकिन इंजरी टाइम में मोरक्को ने बराबरी कर मुकाबले को पेनल्टी शूटआउट तक पहुंचा दिया। गोलकीपर के शानदार प्रदर्शन और सटीक पेनल्टी की बदौलत मोरक्को ने यूरोप की एक और बड़ी टीम को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
विश्व फुटबॉल का बदलता परिदृश्य
इस विश्व कप में केवल एक-दो उलटफेर नहीं हुए हैं। कई छोटे देशों ने मजबूत टीमों को बराबरी पर रोका या उन्हें कड़ी चुनौती दी है। इससे स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल का स्तर पहले की तुलना में काफी संतुलित हो चुका है। अब केवल इतिहास या प्रतिष्ठा के आधार पर कोई टीम जीत की गारंटी नहीं दे सकती।
दिग्गजों के सामने नई चुनौतियाँ
ब्राजील, जर्मनी और नीदरलैंड्स के अनुभव ने अन्य दावेदारों के लिए स्पष्ट संदेश छोड़ा है। फ्रांस, स्पेन, इंग्लैंड, अर्जेंटीना और पुर्तगाल जैसी टीमें अब किसी मुकाबले को हल्के में नहीं ले सकतीं। 48 टीमों वाला विश्व कप दिखा रहा है कि नॉकआउट चरण में केवल मौजूदा प्रदर्शन ही जीत और हार का फैसला करता है।