बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड में प्रशासनिक संकट: मंत्रालय और बोर्ड आमने-सामने
बांग्लादेश क्रिकेट का संकट
नई दिल्ली: बांग्लादेश क्रिकेट वर्तमान में एक गंभीर प्रशासनिक संकट का सामना कर रहा है, जिसमें क्रिकेट बोर्ड और खेल मंत्रालय के बीच टकराव हो रहा है। पिछले वर्ष हुए बोर्ड चुनावों में धांधली और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों के चलते मंत्रालय ने एक जांच समिति का गठन किया है। इस कार्रवाई से बीसीबी (बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड) बेहद नाराज है और उसने सरकार को चेतावनी दी है कि इसके गंभीर अंतरराष्ट्रीय परिणाम हो सकते हैं। बोर्ड का मानना है कि यह हस्तक्षेप आईसीसी के नियमों का उल्लंघन है, जिससे देश के क्रिकेट पर प्रतिबंध लग सकता है।
जांच समिति का गठन
मंत्रालय ने चुनावों में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय समिति बनाई है। इस समिति को 11 मार्च से अगले 15 कार्यदिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। जांच का मुख्य उद्देश्य सत्ता के दुरुपयोग और चुनावी हेरफेर के गंभीर आरोपों की सच्चाई को उजागर करना है। बीसीबी का कहना है कि वे एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक संस्था हैं और ऐसी जांच उनकी स्वायत्तता को प्रभावित करती है। बोर्ड ने इस समिति को तुरंत समाप्त करने की मांग की है।
आईसीसी के नियमों का उल्लंघन
बीसीबी के अनुसार, इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अधिकारियों से चर्चा की जा चुकी है। आईसीसी सरकारी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करता और नियमों के उल्लंघन पर प्रतिबंध लगा सकता है। इससे पहले जिम्बाब्वे और श्रीलंका जैसे देशों को इसी कारण निलंबन का सामना करना पड़ा है। बोर्ड का कहना है कि वह आईसीसी में शिकायत करने से पहले स्थानीय खेल परिषद से बात करना चाहता है ताकि क्रिकेट की स्थिरता को कोई खतरा न पहुंचे।
तमीम इकबाल के आरोप
इस विवाद की जड़ें पूर्व कप्तान तमीम इकबाल के आरोपों में हैं। उन्होंने बोर्ड अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। तमीम के अनुसार, अमीनुल ने मंत्रालय को पत्र लिखकर कुछ जिलों के काउंसलर बदलवाए और नामांकन की तारीखें भी बार-बार बढ़वाईं। हालांकि, अध्यक्ष ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है। खिलाड़ियों के बीच उभरे इस मतभेद ने बोर्ड की चुनावी साख पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनाव के बाद की स्थिति
अक्टूबर में हुए चुनावों के बाद स्थिति सामान्य नहीं हुई। कई समूहों और क्लब अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में 'इंजीनियरिंग' के आरोप लगाए। हालात तब और बिगड़ गए जब एक नवनिर्वाचित निदेशक को पद छोड़ना पड़ा क्योंकि उनके विवादास्पद राजनीतिक संबंध सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। तमीम इकबाल ने भी अंततः अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी। इन घटनाओं ने साबित कर दिया कि चुनाव जीतने के बाद भी बोर्ड के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।