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भारतीय क्रिकेट में चोटों की बढ़ती समस्या पर चर्चा

भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की चोटों की बढ़ती घटनाओं ने BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल चोटिल खिलाड़ियों के उपचार तक सीमित नहीं है। उन्होंने पेशेवर क्रिकेटरों के करियर में चोटों को सामान्य बताया और प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम की आवश्यकता पर जोर दिया। जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ियों की चोटों ने चिंता बढ़ा दी है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

चोटों की बढ़ती संख्या पर चिंता

भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की चोटों की बढ़ती घटनाओं ने BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जसप्रीत बुमराह, साई सुदर्शन, हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर टीम प्रबंधन चिंतित है।


CoE प्रमुख का बयान

CoE के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने बेंगलुरु में कहा कि संस्थान की जिम्मेदारी केवल चोटिल खिलाड़ियों के उपचार तक सीमित नहीं है। उन्होंने किसी एक व्यक्ति या विभाग को दोषी ठहराने से भी इनकार किया।


चोटें: खिलाड़ियों के करियर का हिस्सा

लक्ष्मण ने कहा कि पेशेवर क्रिकेटरों के करियर में चोट लगना सामान्य है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि CoE केवल एक रिहैब सेंटर नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों की निरंतर निगरानी आवश्यक है।


उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान किसी एक विभाग को दोषी ठहराने से नहीं होगा, बल्कि प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम पर ध्यान देना होगा। CoE का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना और उनकी फिटनेस पर लगातार काम करना है।


बुमराह और सुदर्शन की चोटों से बढ़ी चिंता

जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज से बाहर हो चुके हैं। बुमराह की घुटने की चोट और फ्लूइड रिटेंशन की समस्या उनकी वापसी में बाधा बनी है, जबकि सुदर्शन बाएं पैर के अंगूठे में दर्द के कारण अभ्यास में भाग नहीं ले सके।


हर्षित राणा की चोट पर सवाल

हर्षित राणा की फिटनेस को लेकर सबसे अधिक चर्चा हुई है। हैमस्ट्रिंग चोट के कारण चार महीने बाद मैदान पर लौटने के बाद, उनकी समस्या फिर से उभर आई है। इससे उनकी वापसी प्रक्रिया और फिटनेस मंजूरी पर सवाल उठ रहे हैं।


नीतीश की गेंदबाजी पर ध्यान

नीतीश कुमार रेड्डी का मामला खिलाड़ियों के बढ़ते कार्यभार से संबंधित है। वह गेंदबाजी की गति में सुधार करने पर काम कर रहे थे, जिससे उनकी हैमस्ट्रिंग और क्वाड्रिसेप्स पर असर पड़ा। इसने कौशल सुधार के दौरान कार्यभार की निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा किया है।