भारतीय क्रिकेटर्स की फिटनेस ट्रैकिंग डिवाइस का रहस्य
क्रिकेटर्स की फिटनेस पर ध्यान
नई दिल्ली: क्रिकेट खिलाड़ी अपनी फिटनेस को लेकर बेहद सजग रहते हैं। उन्हें अपनी गतिविधियों का निरंतर अवलोकन करना आवश्यक होता है। इसी कारण भारतीय क्रिकेटर्स विभिन्न प्रकार के उन्नत उपकरणों का उपयोग करते हैं। हाल ही में एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई है, जिसमें रोहित शर्मा, विराट कोहली, केएल राहुल और हार्दिक पांड्या की पीठ पर एक छोटी डिवाइस नजर आ रही है। अब लोग जानना चाहते हैं कि यह डिवाइस क्या है और इसका उपयोग क्यों किया जाता है।
पीठ पर लगी डिवाइस का विवरण
क्या है यह डिवाइस?
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, यह एक जीपीएस परफॉर्मेंस ट्रैकिंग यूनिट है। इसका उपयोग खिलाड़ी मैदान पर अपनी गतिविधियों और प्रदर्शन से संबंधित डेटा रिकॉर्ड करने के लिए करते हैं। यह डिवाइस एक विशेष पाउच में रखी जाती है और खिलाड़ियों की जर्सी या कंप्रेशन वेस्ट के ऊपरी हिस्से में, कंधों के बीच पीठ पर लगाई जाती है। जब खिलाड़ी मैदान पर ट्रेनिंग या प्रैक्टिस करते हैं, तब यह डिवाइस उनके हर मूवमेंट को ट्रैक करती है और सभी डेटा को रिकॉर्ड करती है।
डिवाइस का कार्यप्रणाली
कैसे काम करती है यह डिवाइस?
यह डिवाइस खिलाड़ियों की हर गतिविधि को ट्रैक करती है। इसमें यह रिकॉर्ड होता है कि खिलाड़ियों ने कितनी दूरी तय की है, उनकी दौड़ने की गति, किस प्रकार की गतिविधियाँ की गई हैं, और ट्रेनिंग के दौरान उनके शरीर पर कितना लोड पड़ा है। कुछ सिस्टम हार्ट रेट जैसे फिटनेस डेटा को भी ट्रैक करते हैं। इससे कोच और सपोर्ट स्टाफ को यह समझने में मदद मिलती है कि वे खिलाड़ियों को ट्रेनिंग में कितनी मेहनत कर रहे हैं।
क्रिकेटर्स के लिए लाभ
क्रिकेटर्स को क्या फायदा होता है?
इस डिवाइस का सबसे बड़ा लाभ फिटनेस प्रबंधन है। डेटा के आधार पर, टीम का सपोर्ट स्टाफ खिलाड़ियों की ट्रेनिंग की गति को निर्धारित करता है। यदि किसी खिलाड़ी पर लोड अधिक हो जाता है, तो उनकी ट्रेनिंग में बदलाव किया जा सकता है। इससे शरीर पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को समझने और चोट के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। इसी डेटा का उपयोग खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग, रिकवरी और फिटनेस योजनाएँ बनाने में भी किया जाता है।
अन्य टीमों का उपयोग
क्या यह डिवाइस सिर्फ भारतीय टीम इस्तेमाल करती है?
नहीं, जीपीएस आधारित परफॉर्मेंस ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग विश्वभर की कई पेशेवर खेल टीमों द्वारा किया जाता है। भारतीय क्रिकेट में भी इस तकनीक का पहले से उपयोग होता रहा है। इसके अलावा, क्रिकेट में Catapult जैसी कंपनियों की तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाता है।