भारतीय चेस खिलाड़ियों ने ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में रचा इतिहास
बोधना और श्रेयस की ऐतिहासिक जीत
भारतीय मूल की बोधना शिवानंदन और श्रेयस रॉयल ने ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में अद्वितीय सफलता हासिल की है। 9 अगस्त को संपन्न हुई इस प्रतियोगिता में 11 वर्षीय बोधना ने ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला चेस चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। प्रतियोगिता के दौरान दर्शक उन्हें प्यार से 'गोधना' कहकर प्रोत्साहित कर रहे थे। उन्होंने आयरलैंड की 14 वर्षीय खिलाड़ी त्रिशा कन्यमाराला को रोमांचक रैपिड चेस प्लेऑफ में हराकर खिताब जीता।
बोधना ने कोविड-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन के समय चेस खेलना शुरू किया था। उनके चेस से जुड़ने का कारण तब बना जब उनके पिता के एक मित्र भारत लौटते समय कुछ बैग छोड़ गए, जिनमें एक चेस बोर्ड भी था। बोधना ने कहा, 'मुझे चेस के मोहरे बहुत आकर्षक लगे, इसलिए मैंने खेलना शुरू कर दिया।'
बोधना की चेस में उपलब्धियां
बोधना की चेस में उपलब्धियां
बोधना ने अपनी कम उम्र में कई रिकॉर्ड तोड़े हैं और चेस की तेज फॉर्मेट में पहले ही 'UK ओपन महिला ब्लिट्ज' चैंपियन और संयुक्त ब्रिटिश महिला रैपिड चैंपियन बन चुकी हैं। अब क्लासिकल फॉर्मेट में इस जीत के साथ उन्होंने शानदार हैट्रिक पूरी की है।
श्रेयस की शानदार प्रदर्शन
श्रेयस का भी कमाल
इस चैंपियनशिप में बोधना को एकमात्र हार छठे राउंड में श्रेयस रॉयल के हाथों मिली। 17 वर्षीय श्रेयस ने 9 राउंड के बाद तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त कर ब्रिटिश खिताब अपने नाम किया। उन्होंने इंग्लैंड के अनुभवी ग्रैंडमास्टर्स को आधे अंक से पीछे छोड़ दिया। यह उनका पहला ब्रिटिश खिताब था।
भारत में जन्मे श्रेयस तीन साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ बेंगलुरु से ब्रिटेन चले गए थे। लगभग आठ साल पहले इंग्लिश चेस फेडरेशन ने गृह मंत्रालय से विशेष अनुरोध किया था कि इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी को ब्रिटेन में रहने की अनुमति दी जाए।
ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप का महत्व
ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप का महत्व
ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप के 122 सालों के इतिहास में 2026 में हुई इस प्रतियोगिता को सबसे बड़ा आयोजन माना जा रहा है। इस चैंपियनशिप में 1,750 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया और ओपन चैंपियनशिप के लिए रिकॉर्ड 34,000 पाउंड की पुरस्कार राशि घोषित की गई।