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भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशिया कप में जीता खिताब, ट्रॉफी समारोह पर उठे सवाल

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एशिया कप में श्रीलंका को हराकर खिताब जीता, लेकिन ट्रॉफी समारोह में भाग नहीं लिया। इस घटना ने सवाल उठाए हैं कि क्या ट्रॉफी देने का अधिकार केवल एसीसी अध्यक्ष के पास है। पिछले समारोहों में ट्रॉफी अन्य अधिकारियों द्वारा भी दी गई थी। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और भविष्य में क्या हो सकता है।
 

महिला क्रिकेट टीम की एशिया कप जीत


भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 13 सितंबर को श्रीलंका को 72 रन से हराकर एशिया कप का अपना आठवां खिताब हासिल किया। टीम का प्रदर्शन मैदान पर उत्कृष्ट रहा, लेकिन ट्रॉफी समारोह ने सभी का ध्यान खींचा। एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहसिन नकवी मंच पर उपस्थित थे, लेकिन भारतीय खिलाड़ी पुरस्कार लेने नहीं आईं। इसके परिणामस्वरूप, टीम को चैम्पियन बनने के बावजूद ट्रॉफी और मेडल नहीं मिल सके। अब यह सवाल उठता है कि क्या ट्रॉफी देने का अधिकार केवल ACC अध्यक्ष के पास है।


क्या ACC अध्यक्ष ही ट्रॉफी देते हैं?

एशिया कप के पिछले समारोहों पर गौर करें तो स्थिति कुछ भिन्न नजर आती है। 2022 में श्रीलंका की पुरुष टीम ने खिताब जीता था और उन्हें ट्रॉफी श्रीलंका क्रिकेट के पूर्व अध्यक्ष शम्मी सिल्वा ने सौंपी थी। उस समय ACC की जिम्मेदारी जय शाह के पास थी। इसका मतलब यह है कि विजेता को सम्मानित करने के लिए ACC अध्यक्ष की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।


2024 में भी यही प्रक्रिया देखी गई

महिला एशिया कप 2024 में श्रीलंका की महिला टीम ने खिताब जीता। उस समारोह में भी ट्रॉफी SLC अध्यक्ष शम्मी सिल्वा ने विजेता खिलाड़ियों को दी थी। उस समय भी जय शाह ACC अध्यक्ष थे। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि ट्रॉफी प्रेजेंटेशन का तरीका पहले अलग रहा है और किसी एक अधिकारी के हाथों से पुरस्कार देना कोई स्थायी परंपरा नहीं है।


2025 के बाद फिर से वही निर्णय

2025 के पुरुष एशिया कप में भारत ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता, लेकिन मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया गया था। 2026 में महिला टीम ने भी इसी रुख को बनाए रखा। हेड कोच अमोल मजूमदार ने बताया कि यह निर्णय BCCI का था और पूरी टीम इसके साथ है। उनका कहना था कि भारत चैम्पियन बन चुका है और उनके लिए टूर्नामेंट समाप्त हो गया है।


भविष्य में क्या हो सकता है?

ट्रॉफी समारोह का विवाद लगातार दूसरे वर्ष चर्चा में है। ऐसे में भविष्य में किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है, जिसमें किसी अन्य अधिकारी या संबंधित क्रिकेट बोर्ड के प्रतिनिधि से ट्रॉफी दी जाए। 2022 और 2024 के उदाहरण बताते हैं कि ऐसा तरीका पहले अपनाया जा चुका है। फिलहाल, भारतीय टीम ने मैदान पर अपना कार्य पूरा कर लिया है, लेकिन ट्रॉफी समारोह ने एक बार फिर क्रिकेट से अलग मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।