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महिला टी20 विश्व कप 2026: हरमनप्रीत कौर को मिला समर्थन, भविष्य की तैयारी पर ध्यान

महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, जिससे कप्तान हरमनप्रीत कौर की भूमिका पर सवाल उठने लगे। हालांकि, उन्हें कोच और पूर्व खिलाड़ियों का समर्थन मिला है। जानें कैसे टीम भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी कर रही है और क्या बदलाव संभव हैं।
 

भारतीय टीम का विश्व कप सफर


महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम की यात्रा उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही। लगातार दूसरी बार टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे कप्तानी और रणनीति पर सवाल उठने लगे। हालांकि, इस कठिन समय में कप्तान हरमनप्रीत कौर को टीम प्रबंधन और पूर्व खिलाड़ियों का समर्थन प्राप्त हुआ है। मुख्य कोच अमोल मुजुमदार ने स्पष्ट किया कि उनके अनुसार हरमनप्रीत अभी भी टीम का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त हैं।


ग्रुप स्टेज में समाप्त हुआ सफर

भारतीय टीम ग्रुप ए के एक महत्वपूर्ण मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया से हार गई, जिसके बाद उनका टूर्नामेंट से बाहर होना तय हो गया। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका ने सेमीफाइनल में अपनी जगह बना ली। इस मैच में एलिस पेरी और एशले गार्डनर की शतकीय साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया की जीत की मजबूत नींव रखी।


कोच का कप्तान पर भरोसा

मैच के बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब कोच अमोल मुजुमदार से हरमनप्रीत की कप्तानी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय चयनकर्ताओं का होगा, लेकिन उनकी राय में हरमनप्रीत को कप्तान बने रहना चाहिए। कोच का यह बयान टीम के भीतर उनके प्रति विश्वास को दर्शाता है।


अंजुम चोपड़ा का समर्थन

पूर्व भारतीय क्रिकेटर अंजुम चोपड़ा ने भी हरमनप्रीत का समर्थन किया। उनका मानना है कि वर्तमान में भारतीय महिला टीम का नेतृत्व करने के लिए हरमनप्रीत से बेहतर विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि कप्तानी में बदलाव करने के बजाय टीम के खेल के तरीके पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।


अंजुम चोपड़ा ने यह भी कहा कि भारतीय टीम को टी20 क्रिकेट की मांग के अनुसार अधिक निडर और आक्रामक बल्लेबाजी करनी होगी। उनके अनुसार, महिला प्रीमियर लीग में खिलाड़ी जिस आत्मविश्वास के साथ खेलती हैं, वही रवैया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाना चाहिए।


भविष्य की तैयारी पर ध्यान

विश्व कप से जल्दी बाहर होने के बाद भारतीय टीम के सामने आत्ममंथन की चुनौती है। टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं की नजर अब आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी पर होगी। इसके साथ ही युवा खिलाड़ियों को निखारने और टीम के प्रदर्शन में निरंतरता लाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।