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विजय शंकर ने क्रिकेट को कहा अलविदा, साझा किया 25 साल का सफर

भारतीय ऑलराउंडर विजय शंकर ने अपने 25 साल के क्रिकेट करियर को अलविदा कह दिया है। उन्होंने अपने सफर के दौरान मिले अनुभवों और यादों को साझा किया। शंकर ने बताया कि क्रिकेट उनके लिए केवल खेल नहीं, बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने वर्ल्ड कप और आईपीएल में अपने अनुभवों को याद किया और आलोचनाओं का सामना करते हुए अपने संघर्ष को भी साझा किया। जानें उनके इस भावुक विदाई के बारे में।
 

भारतीय ऑलराउंडर विजय शंकर का भावुक विदाई


भारतीय क्रिकेट के जाने-माने ऑलराउंडर विजय शंकर, जिन्हें '3D शंकर' के नाम से भी जाना जाता है, ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। यह नाम उन्हें 2019 के ICC मेन्स ODI विश्व कप के दौरान MSK प्रसाद द्वारा दिया गया था, जिन्होंने कहा था कि शंकर बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग में माहिर हैं। 35 वर्षीय इस खिलाड़ी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने 25 साल के क्रिकेट सफर का जिक्र किया।


25 साल की यात्रा का समापन

विजय शंकर ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा कि क्रिकेट उनके लिए केवल एक खेल नहीं था, बल्कि यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने बताया कि 10 साल की उम्र से क्रिकेट खेलते हुए उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। तमिलनाडु के लिए घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए, उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाने का सपना पूरा किया। उन्होंने कहा कि देश की जर्सी पहनना उनके जीवन के सबसे गर्वित क्षणों में से एक रहेगा।


विशेष वर्ल्ड कप और आईपीएल की यादें

विजय शंकर 2019 के वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का हिस्सा थे, जहां उन्हें 'थ्री-डायमेंशनल प्लेयर' के रूप में पहचान मिली। उन्होंने नागपुर में भारत के 500वें वनडे मैच और वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लेने के क्षण को विशेष बताया। आईपीएल में भी उन्होंने कई प्रमुख टीमों जैसे गुजरात टाइटन्स, सनराइजर्स हैदराबाद, चेन्नई सुपर किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेला, जहां उन्होंने 78 मैचों में 1233 रन बनाए।


आलोचनाओं का सामना करते हुए विजय का संघर्ष

अपने लंबे संदेश में विजय शंकर ने स्वीकार किया कि उनके क्रिकेट करियर के दौरान उन्हें कई बार ट्रोलिंग और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर नफरत और निगेटिविटी कभी-कभी बहुत अधिक हो जाती थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और खुद को मजबूत बनाए रखा। विजय ने हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया।