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विश्वजीत मोरे: भारतीय कुश्ती में नया इतिहास रचने वाले वीर

विश्वजीत मोरे ने लास वेगास में आयोजित अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर भारतीय कुश्ती का नया इतिहास रचा है। कोल्हापुर के इस वीर ने कठिनाइयों का सामना करते हुए अपनी मेहनत और लगन से यह उपलब्धि हासिल की। जानें उनकी प्रेरणादायक यात्रा और कैसे उन्होंने अपने हौसले से नामुमकिन को मुमकिन किया।
 

विश्वजीत मोरे की प्रेरणादायक कहानी


विश्वजीत मोरे: क्या आपने कभी सोचा है कि जब किस्मत रास्ते बंद कर दे, तो इतिहास कैसे लिखा जाता है? आज हम बात करेंगे एक ऐसे जांबाज की, जिसने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया। मिलिए भारतीय सेना के हवलदार और देश के गौरव विश्वजीत रामचंद्र मोरे से, जिन्होंने लास वेगास में आयोजित अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में वो कर दिखाया जो आज तक कोई भारतीय नहीं कर पाया!


कोल्हापुर के सरवड़े गांव के निवासी विश्वजीत के पिता रामचंद्र मोरे खेतों में सब्जियां उगाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सुविधाओं की कमी और पैसे की तंगी के बावजूद, विश्वजीत का सपना था—देश के लिए मेडल जीतना। भारतीय सेना में हवलदार के रूप में देश की सेवा कर रहे इस वीर मल्ल ने अखाड़े की मिट्टी से निकलकर सीधे इंटरनेशनल मैट का रुख किया।


इस सफर की शुरुआत आसान नहीं थी। जहां भारत के 9 पहलवानों को अमेरिकी वीज़ा न मिलने के कारण इस बड़े टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा, वहीं अकेले विश्वजीत मोरे हर मुश्किल का सामना करते हुए अमेरिका पहुंचे। उनका इरादा स्पष्ट था—मैट पर सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लिए लड़ना है!


55 किलोग्राम ग्रीको-रोमन कैटगरी में जब विश्वजीत ने मुकाबला शुरू किया, तो उन्होंने दुनिया को चौंका दिया। क्वार्टर फाइनल में ईरान के अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियन आर्मिन शम्सीपुर को 8-1 से हराकर विश्वजीत 'जायंट किलर' बन गए! सेमीफाइनल में रूसी पहलवान को हराकर वे सीधे फाइनल में पहुंचे—चैंपियनशिप के इतिहास में ऐसा करने वाले पहले भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवान!


फाइनल में उनका मुकाबला जॉर्जिया के कोबा कारुमिद्जे से था। यह मुकाबला आखिरी सेकंड तक चला और 12-13 के बेहद करीबी अंतर पर समाप्त हुआ। भले ही वे गोल्ड से चूक गए, लेकिन उन्होंने रजत पदक जीतकर ऐसा इतिहास रच दिया, जिसकी गूंज सालों तक सुनाई देगी!


लगातार तीन बार (2024, 2025 और अब 2026) इस चैंपियनशिप में मेडल का हैट्रिक लगाने वाले विश्वजीत आज देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं! उनकी कहानी हमें सिखाती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, अगर आपके हौसले मजबूत हैं, तो आप इतिहास बदल सकते हैं। देश के इस वीर को हमारा सलाम!