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शशि थरूर का मुस्तफिजुर रहमान के समर्थन में बयान: खेल को राजनीति से न जोड़ें

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है और क्रिकेट को राजनीति से अलग रखने की अपील की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस फैसले से किसी को सजा दी जा रही है। थरूर का मानना है कि खिलाड़ियों पर हिंसा का बोझ डालना अनुचित है और भारत को बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। उनका संदेश स्पष्ट है कि खेल को राजनीतिक हथियार बनाना समाधान नहीं है।
 

शशि थरूर का बयान


नई दिल्ली: कांग्रेस के सांसद और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में क्रिकेट जैसे खेल का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। यह बयान तब आया जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के निर्देश पर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल 2026 के लिए टीम से बाहर करने का निर्णय लिया।


सजा किसे दी जा रही है?

थरूर ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने पूछा कि इस फैसले से किसे सजा दी जा रही है - एक देश को, एक व्यक्ति को या उसके धर्म को? उन्होंने यह भी कहा कि यदि मुस्तफिजुर की जगह बांग्लादेश के हिंदू क्रिकेटर लिटन दास या सौम्या सरकार होते, तो क्या प्रतिक्रिया वही होती? उनके अनुसार, खेल को राजनीति और धार्मिक पहचान से जोड़ना खतरनाक हो सकता है।


आईपीएल नीलामी से विवाद तक

मुस्तफिजुर रहमान को दिसंबर 2025 में आईपीएल 2026 की मिनी नीलामी में केकेआर ने 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था, जो किसी भी बांग्लादेशी खिलाड़ी के लिए एक बड़ी राशि मानी गई। शुरुआत में यह निर्णय पूरी तरह से क्रिकेटिंग कारणों से चर्चा में था, लेकिन बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों की खबरों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रंग लेने लगा। कई भाजपा नेताओं ने रहमान को टीम से हटाने की मांग की, जिससे विवाद बढ़ता गया।


खिलाड़ियों पर हिंसा का बोझ न डालें

पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने स्पष्ट कहा कि बांग्लादेश में हो रही हिंसा की जिम्मेदारी किसी खिलाड़ी पर डालना अनुचित है। उन्होंने कहा कि भारत को बांग्लादेश सरकार पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए दबाव बनाना चाहिए, लेकिन मुस्तफिजुर का इन घटनाओं से कोई संबंध नहीं है। न उन पर नफरत फैलाने का आरोप है और न ही किसी हिंसक गतिविधि में शामिल होने का।


पड़ोसियों को अलग-थलग करने का क्या लाभ?

थरूर ने खेल बहिष्कार के जरिए पड़ोसी देशों को अलग-थलग करने की नीति पर भी सवाल उठाया। उनके अनुसार, यदि भारत अपने आसपास के सभी देशों से दूरी बनाने लगे, तो इससे कोई रचनात्मक समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बड़े दिल और बड़े दिमाग से काम लेने की आवश्यकता है, ताकि संवाद और दबाव दोनों के जरिए हालात सुधारे जा सकें।


राजनीतिक बयानबाजी का विवाद

इस पूरे मामले को तब और तूल मिला, जब भाजपा नेता संगीत सोम ने मुस्तफिजुर को साइन करने पर केकेआर के मालिक शाहरुख खान को गद्दार तक कह दिया। अन्य भाजपा और शिवसेना नेताओं ने भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का हवाला देकर रहमान के आईपीएल खेलने का विरोध किया।


बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले

थरूर की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिसने समुदाय में डर का माहौल और गहरा कर दिया है। इससे पहले भी कई हिंदुओं की हत्या और लिंचिंग की घटनाएं रिपोर्ट हो चुकी हैं।


भारत की चिंता

भारत सरकार ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा पर गहरी चिंता जताई है। शशि थरूर का मानना है कि इस चिंता को कूटनीतिक दबाव और संवाद के जरिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए, न कि खेल को सजा का माध्यम बनाकर। उनका संदेश स्पष्ट है कि न्याय की लड़ाई जरूरी है, लेकिन खेल को राजनीतिक हथियार बनाना समाधान नहीं है।