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संजू सैमसन की संघर्ष भरी कहानी: विश्व कप ने बदली किस्मत

भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने हाल ही में अपने करियर के कठिन दौर का जिक्र किया, जब उन्हें लगा कि उनका अंतरराष्ट्रीय सफर खत्म होने वाला है। विश्व कप में मिले मौके ने उनकी किस्मत बदल दी। जानें कैसे उन्होंने अपने संघर्ष को पार किया और टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
 

सफलता के पीछे का संघर्ष


नई दिल्ली: क्रिकेट में जो सफलता नजर आती है, उसके पीछे एक लंबा संघर्ष छिपा होता है। भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने हाल ही में अपने करियर के एक कठिन दौर का जिक्र किया, जब उन्हें लगा कि उनका अंतरराष्ट्रीय सफर समाप्त होने वाला है। लेकिन समय ने एक नया मोड़ लिया और वह खिलाड़ी टीम की सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए।


विश्व कप से पहले का तनाव

संजू ने बताया कि विश्व कप से पहले उनका प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा था, जिससे वह खुद भी चिंतित थे। लगातार असफलता के कारण उनकी टीम में स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय वह मानसिक दबाव में थे और भविष्य को लेकर चिंतित थे।


तिरुवनंतपुरम मैच का प्रभाव

संजू ने उस समय को याद करते हुए कहा, "तिरुवनंतपुरम में बैटिंग में असफलता के बाद, जब मैंने किशन को विकेटकीपिंग ग्लव्स सौंपे, तो मुझे लगा कि यह मेरे करियर का अंतिम मैच था। लेकिन फिर विश्व कप आया, मुझे अचानक एक मौका मिला, मैंने अच्छा प्रदर्शन किया और टीम को जीत दिलाने में मदद की।"


🚨 “AFTER FAILING WITH THE BAT IN TRIVANDRUM AND HANDING THE GLOVES TO KISHAN, I FELT LIKE IT WAS THE LAST MATCH OF MY CAREER” 🚨

Sanju samson:- “Before the World Cup, I was struggling with the bat and couldn’t score runs. In Trivandrum last T20i against nz, after a poor outing… pic.twitter.com/dp6RaUrLYg

— Muffatball vikrant (@Vikrant_1589) June 13, 2026



आत्मविश्वास में कमी

लगातार खराब प्रदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को भी प्रभावित किया। एक खिलाड़ी के लिए टीम में अपनी भूमिका को कम होते देखना आसान नहीं होता। संजू के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि वह खुद को साबित करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं आ रहे थे।


विश्व कप ने बदली कहानी

हालांकि, परिस्थितियां अचानक बदल गईं। विश्व कप के दौरान उन्हें एक मौका मिला और उन्होंने उस अवसर का पूरा लाभ उठाया। संजू ने न केवल प्रभावशाली प्रदर्शन किया, बल्कि टीम की जीत में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके शानदार खेल ने आलोचकों को जवाब देने के साथ-साथ टीम में उनकी अहमियत भी साबित कर दी। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ 97*, सेमीफाइनल में इंग्लैंड और फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ 89-89 रनों की वीनिंग पारी खेली।