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हरियाणा की मीनाक्षी गोयत ने एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल्स में किया बड़ा उलटफेर

हरियाणा की युवा पहलवान मीनाक्षी गोयत ने एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल्स में अनुभवी विनेश फोगाट को हराकर सबको चौंका दिया है। इस जीत ने मीनाक्षी को पूरे देश में चर्चित कर दिया है। जानें उनके संघर्ष, प्रेरणा और भविष्य की संभावनाओं के बारे में।
 

मीनाक्षी गोयत का शानदार प्रदर्शन

एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल्स में हरियाणा की युवा पहलवान मीनाक्षी गोयत ने एक बड़ा उलटफेर करते हुए अनुभवी पहलवान विनेश फोगाट को हराकर सभी का ध्यान खींचा है। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित 53 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में मीनाक्षी ने विनेश को 6-4 से हराया। इस हार के साथ विनेश का एशियन गेम्स में खेलने का सपना समाप्त हो गया, जबकि मीनाक्षी की सफलता ने उन्हें पूरे देश में चर्चित कर दिया है। मीनाक्षी जॉन सीना की बड़ी प्रशंसक हैं और उन्होंने कुश्ती में कदम रखने के लिए उनसे प्रेरणा ली।


साधारण परिवार से आई मीनाक्षी

मीनाक्षी गोयत जींद जिले के निडानी गांव से हैं और एक साधारण परिवार में पली-बढ़ी हैं। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते, उनके परिवार ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए बेहतर प्रशिक्षण के लिए जींद छोड़कर सोनीपत में बसने का निर्णय लिया। उनके पिता डेयरी व्यवसाय में हैं और उन्होंने मीनाक्षी की ट्रेनिंग, खानपान और खेल से जुड़ी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।


जॉन सीना से मिली प्रेरणा

मीनाक्षी ने कई इंटरव्यू में बताया है कि उन्हें बचपन से ही कुश्ती का शौक था। WWE सुपरस्टार जॉन सीना उनके पसंदीदा खिलाड़ी रहे हैं। टीवी पर जॉन सीना के मुकाबले देखकर ही उनके मन में पहलवान बनने की इच्छा जागृत हुई। इसके बाद, उन्होंने केवल 10 साल की उम्र में कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू की और अपने गांव के स्थानीय अखाड़े में अभ्यास करना शुरू किया।


संघर्षों का सामना

मीनाक्षी का सफर कई संघर्षों से भरा रहा। जब उनके परिवार ने बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें हॉस्टल भेजने का निर्णय लिया, तो कई रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया। लोगों ने परिवार को ताने दिए कि लड़की को कुश्ती सिखाना और घर से दूर भेजना उचित नहीं है। हालांकि, मीनाक्षी और उनके माता-पिता ने इन आलोचनाओं को नजरअंदाज करते हुए अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।


मेहनत का फल

कैडेट स्तर पर पदक जीतने के बाद मीनाक्षी को हरियाणा सरकार से पुरस्कार मिलने लगे। दंगलों में जीतने और पुरस्कार राशि हासिल करने के बावजूद भी लोगों ने तरह-तरह की बातें कीं, लेकिन परिवार ने कभी हार नहीं मानी। उनकी लगातार मेहनत और समर्पण का परिणाम है कि आज मीनाक्षी देश की सबसे चर्चित युवा पहलवानों में से एक बन गई हैं। विनेश फोगाट जैसी दिग्गज खिलाड़ी को हराकर मीनाक्षी ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा और मेहनत से किसी भी बड़े मुकाम तक पहुंचा जा सकता है। अब खेल प्रेमियों की नजरें उनके आगामी मुकाबलों और एशियन गेम्स में संभावित प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं।