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काशी में अंतरराष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का भव्य उद्घाटन

काशी में श्री काशी विश्वनाथ धाम के कॉरिडोर में अंतरराष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का उद्घाटन हुआ, जिसमें 50 कलाकारों ने भाग लिया। यह आयोजन भारतीय संस्कृति और धार्मिक चेतना को कला के माध्यम से व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यशाला का विषय 'राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेश' है, जिसमें कलाकार उत्तर प्रदेश की धरोहरों को अपने कैनवास पर उकेरेंगे। प्रदर्शनी 3 से 5 नवंबर को आयोजित की जाएगी, जिससे कला प्रेमियों को सांस्कृतिक विरासत को देखने का अवसर मिलेगा।
 

अंतरराष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ

सांस्कृतिक संसद: धर्म, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति की ऐतिहासिक नगरी काशी में, शनिवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम के भव्य कॉरिडोर में ललिता घाट पर अंतरराष्ट्रीय चित्रकला एवं छायाचित्र कार्यशाला का भव्य उद्घाटन हुआ। यह तीन दिवसीय कार्यशाला गंगा महासभा और ललित कला अकादमी के सहयोग से आयोजित की गई है, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ मॉरीशस, श्रीलंका और बांग्लादेश से लगभग 50 चित्रकार भाग ले रहे हैं।


प्रतिष्ठित कलाकारों की उपस्थिति

इस कार्यशाला का उद्घाटन अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती, गंगा महासभा के संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा और उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष सुनील विश्वकर्मा ने किया। इस अवसर पर पद्मश्री सम्मानित कलाकार श्रीमती दुलारी देवी, श्री श्याम शर्मा और श्री अद्वैत गणनायक की विशेष उपस्थिति रही। देश-विदेश के प्रतिष्ठित कलाकारों की भागीदारी ने इस आयोजन को एक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।


काशी की धार्मिक चेतना का प्रदर्शन

श्री काशी विश्वनाथ धाम के कॉरिडोर के निर्माण के बाद पहली बार इस परिसर में इतने बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय चित्रकारों की कार्यशाला आयोजित की जा रही है। यह आयोजन काशी की धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना को कला के माध्यम से व्यक्त करने और देश-विदेश के कलाकारों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।


कार्यशाला का विषय और उद्देश्य

कल्पनाशीलता एवं कलात्मक दृष्टि: कार्यशाला का विषय “राम, कृष्ण और शिव की पावन भूमि उत्तर प्रदेश: धरोहर संरक्षण एवं संवर्धन” रखा गया है। इसमें शामिल कलाकार उत्तर प्रदेश के तीर्थों, मंदिरों, धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक धरोहरों को अपनी कलात्मक दृष्टि से कैनवास पर उकेरेंगे।


भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

इस आयोजन का एक विशेष उद्देश्य प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों और धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्रों के विकास को कला के माध्यम से व्यक्त करना भी है। काशी विश्वनाथ धाम के भव्य स्वरूप, अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में हुए प्रयासों को कलाकार अपनी कृतियों में शामिल करेंगे।


सांस्कृतिक स्मृतियों का संरक्षण

आयोजकों के अनुसार, तीर्थों का विकास केवल भौतिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे जुड़ी सभ्यता, आस्था और सांस्कृतिक स्मृतियों का संरक्षण भी आवश्यक है। चित्रकला के माध्यम से इन सांस्कृतिक उपलब्धियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है।


प्रदर्शनी का आयोजन

गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत: कार्यशाला में तैयार की गई सभी कलाकृतियों की प्रदर्शनी 3 से 5 नवंबर 2026 तक रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र की सिंजो आवे कला दीर्घा में आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी में कला प्रेमियों और विद्वानों को कलाकारों की रचनाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को देखने का अवसर मिलेगा।


वैश्विक पहचान का प्रयास

यह अंतरराष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला 3 से 5 नवंबर तक आयोजित होने वाली संस्कृति संसद 2026 के सांस्कृतिक आयोजनों का हिस्सा है। इसके माध्यम से काशी को अंतरराष्ट्रीय कला और सांस्कृतिक संवाद का केंद्र बनाने का प्रयास किया जा रहा है।