दिल्ली में रसोई गैस की कमी से निपटने के लिए वैकल्पिक ईंधन का उपयोग
एलपीजी की कमी और वैकल्पिक ईंधन का उपयोग
नई दिल्ली। भारत सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्पष्ट किया है कि रसोई गैस (एलपीजी) की कोई कमी नहीं है, लेकिन पैनिक बुकिंग के कारण कतारें बढ़ गई हैं। इसके साथ ही, दिल्ली में होटल और रेस्तरां अब प्राकृतिक गैस के स्थान पर बायोमास से बने पेलेट्स, विशेषकर रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) का उपयोग कर सकते हैं। आरडीएफ वास्तव में कचरे से निर्मित एक प्रकार का ईंधन है, जिसमें नगर निगम और उद्योगों से निकलने वाले सूखे कचरे जैसे प्लास्टिक, कागज, कपड़ा और लकड़ी को प्रोसेस किया जाता है। इसके अलावा, कोयला और लकड़ी का भी उपयोग किया जा सकता है।
एलपीजी की कमी से उत्पन्न स्थिति को संभालने के लिए उठाए गए इस कदम से दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण में वृद्धि होने की संभावना है। वास्तव में, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एलपीजी की कमी को देखते हुए कोयला, कचरा और लकड़ी को जलाने की अनुमति दे दी है। आयोग ने उद्योगों, होटलों और रेस्तरां को 'वैकल्पिक ईंधन' के उपयोग में अस्थायी छूट दी है। यह निर्णय ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा और केंद्र सरकार द्वारा जारी 'प्राकृतिक गैस आपूर्ति विनियमन आदेश, 2026' के तहत लिया गया है।
आयोग ने बताया कि प्राकृतिक गैस की उपलब्धता में कमी और विभिन्न हितधारकों की परिचालन संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, पेट्रोलियम मंत्रालय और गैस वितरण एजेंसियों के साथ समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। आयोग ने जून 2022 के अपने पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए कई प्रकार के वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की अनुमति दी है। यह छूट पूरे दिल्ली और एनसीआर में एक महीने के लिए लागू की गई है।
इसमें प्राथमिक विकल्प के रूप में उद्योगों और व्यावसायिक इकाइयों को प्राकृतिक गैस के स्थान पर हाई स्पीड डीजल, बायोमास और आरडीएफ पेलेट्स का उपयोग करने की अनुमति दी गई है। यदि ये विकल्प उपलब्ध नहीं हैं, तो अंतिम उपाय के रूप में कोयले और मिट्टी के तेल के उपयोग की भी अस्थायी अनुमति दी गई है।