नीम करौली बाबा का चमत्कारी कंबल: एक अद्भुत कहानी
नीम करौली बाबा का चमत्कारी कंबल
नीम करौली बाबा का चमत्कारी कंबल: भक्तों के बीच नीम करौली बाबा को प्यार से 'कंबल वाले बाबा' कहा जाता है। बाबा हमेशा एक साधारण कंबल ओढ़े रहते थे, चाहे मौसम कोई भी हो। उनके इस कंबल के साथ कई चमत्कारी कहानियां जुड़ी हुई हैं।
क्या आप सोच सकते हैं कि एक साधारण कंबल किसी की जान बचा सकता है, खासकर जब वह युद्ध के मैदान में हो? कैंची धाम के संत नीम करौली बाबा को हमेशा एक कंबल में देखा गया है। लेकिन इस कंबल के पीछे एक गहरा रहस्य छिपा है, जिसे जानकर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे। आइए जानते हैं बाबा के 'बुलेटप्रूफ' कंबल की सच्चाई।
यह घटना 1943 की है। बाबा के एक भक्त दंपत्ति फतेहगढ़ में रहते थे, जिनका बेटा ब्रिटिश सेना में था और बर्मा में युद्ध लड़ रहा था। महीनों तक बेटे की कोई खबर न मिलने से माता-पिता चिंतित थे। एक रात, बाबा उनके घर आए। दंपत्ति ने बाबा की सेवा की और उन्हें भोजन कराया।
लेकिन उस रात कुछ अजीब हुआ। बाबा कंबल ओढ़कर रातभर कराहते रहे, जैसे कोई उन्हें पीट रहा हो। सुबह होने पर बाबा ने कंबल को समेटकर दंपत्ति को कहा कि इसे गंगा में प्रवाहित कर दें और इसे खोलने की कोशिश न करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनका बेटा एक महीने में लौट आएगा। जब दंपत्ति कंबल लेकर गंगा की ओर बढ़े, तो उन्हें लगा कि कंबल के अंदर कुछ भारी है और उसमें से आवाजें आ रही थीं। उन्होंने बाबा की बात मानकर उसे गंगा में बहा दिया।
बाबा ने अपने भक्त के बेटे पर आने वाली गोलियों के प्रहार को अपने कंबल पर झेल लिया था। इसी कारण अमेरिकी लेखक रिचर्ड अल्बर्ट ने अपनी किताब 'मिरेकल ऑफ लव' में इसे बाबा का 'बुलेटप्रूफ कंबल' कहा है। आज भी भक्त श्रद्धा से कैंची धाम में बाबा को कंबल चढ़ाते हैं।