पश्चिम एशिया संकट: भारतीयों की सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया जारी
विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट: 1.72 लाख भारतीय लौट चुके हैं
विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी अब तक 1.72 लाख भारतीय वापस लौटे
नई दिल्ली में, अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी से ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के चलते स्थिति बिगड़ती जा रही है। ईरान ने उन देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जहाँ अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं। इससे पश्चिम एशिया में नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है।
भारत सरकार ने 28 फरवरी से पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष अभियान शुरू किया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक लगभग 1,72,000 भारतीय नागरिक वापस लौट चुके हैं। ओमान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर से उड़ानों के आने से हवाई संपर्क में सुधार हो रहा है। बहरीन, कुवैत और इराक में फंसे भारतीयों को वीजा विस्तार और यात्रा में सहायता प्रदान की जा रही है।
भारत सरकार अन्य देशों के साथ संपर्क में
भारत पश्चिम एशिया की स्थिति पर रूस सहित कई देशों के साथ बातचीत कर रहा है। भारत ने तनाव कम करने और संवाद के माध्यम से समस्याओं के समाधान का आह्वान किया है। खाड़ी सहयोग परिषद के देशों, ईरान, अमेरिका और इजरायल के साथ ऊर्जा सुरक्षा के लिए राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर संपर्क बनाए रखा गया है।
प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और भारतीय मिशन ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री आवागमन पर अपने समकक्षों के साथ सक्रिय रूप से चर्चा कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय की जानकारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने शनिवार को पत्रकारों को बताया कि संघर्ष के कारण उड़ानों में व्यवधान के चलते, ईरानी अधिकारियों ने भारत में फंसे अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए कोच्चि से एक चार्टर्ड उड़ान की व्यवस्था की। इस उड़ान में 107 चालक दल के सदस्य, 35 ईरानी पर्यटक, 3 राजनयिक और जहाज आईआरआईएस लावन के गैर-आवश्यक चालक दल के सदस्य शामिल थे।