भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ, जींद से सोनीपत के बीच चलेगी
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन
नई दिल्ली। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अब पटरी पर दौड़ने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी। इसमें हाइड्रोजन लीक, गर्मी, आग और धुएं का पता लगाने के लिए कई सुरक्षा तंत्र स्थापित किए गए हैं।
यह ट्रेन आम इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तरह ऊपरी बिजली की लाइनों से ऊर्जा नहीं लेती। इसके बजाय, इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया में केवल पानी की भाप और गर्मी निकलती है। रेलवे के अनुसार, यह ट्रेन पुराने भाप और डीजल इंजन वाली ट्रेनों के समान है, लेकिन इसमें कोयला या डीजल जलाने की बजाय हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है, जिससे कोई धुआं नहीं निकलता। इसलिए इसे रेल यातायात का सबसे स्वच्छ विकल्प माना जा रहा है।
यह ट्रेन 75 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलेगी, जबकि इसकी अधिकतम डिजाइन स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह 89 किलोमीटर के मार्ग पर जींद और सोनीपत के बीच यात्रा करेगी। हाइड्रोजन ट्रेनों का उपयोग अभी विश्व स्तर पर प्रारंभिक चरण में है। जर्मनी ने इस दिशा में पहला कदम उठाया, जबकि फ्रांस, इटली, चीन और जापान जैसे देशों में भी इस पर काम चल रहा है। हालांकि, वहां की ट्रेनों में केवल दो से चार डिब्बे होते हैं।
भारत की यह ट्रेन 10 डिब्बों की है और इसमें लगभग 2600 यात्री यात्रा कर सकते हैं, जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी हाइड्रोजन ट्रेन बन जाती है। जींद में देश का सबसे बड़ा रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग प्लांट भी स्थापित किया गया है, जहां ट्रेन में हाइड्रोजन भरने की पूरी व्यवस्था है। रेलवे भविष्य में कालका-शिमला जैसे हेरिटेज रूट पर भी हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना बना रहा है। पिछले 12 वर्षों में तेज इलेक्ट्रिफिकेशन के कारण डीजल पर निर्भरता काफी कम हुई है, और अब 99 प्रतिशत से अधिक ब्रॉड गेज रूट बिजली से संचालित हो रहे हैं।