भारत में मेथेनॉल: सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन विकल्प
नई दिल्ली में मेथेनॉल का आगाज
नई दिल्ली। भारत सरकार पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता को कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधनों को प्रोत्साहित कर रही है। हाल ही में एक ऐसा ईंधन सामने आया है, जो डीजल की तुलना में काफी सस्ता और कम प्रदूषण फैलाने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, मेथेनॉल भविष्य में ट्रकों, बसों, ट्रैक्टरों, जहाजों और भारी मशीनों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। इसकी कीमत लगभग 20-22 रुपये प्रति लीटर है, जबकि कई राज्यों में डीजल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक है।
उत्पादन और संभावनाएं
हाल ही में एक साक्षात्कार में गडकरी ने बताया कि असम पेट्रो-केमिकल्स प्रतिदिन लगभग 700 टन मेथेनॉल का उत्पादन कर रही है। यदि इस ईंधन का बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू होता है, तो परिवहन क्षेत्र में ईंधन खर्च में काफी कमी आ सकती है, विशेषकर ट्रक और बस ऑपरेटरों के लिए।
सफल परीक्षण
पहले ही सफल हो चुका ट्रायल
मेथेनॉल के उपयोग के दावों के साथ-साथ इसके सफल परीक्षण भी हुए हैं। कर्नाटक में 15 प्रतिशत मेथेनॉल-डीजल मिश्रण के साथ बसों का संचालन लगभग तीन महीने तक किया गया, जिसमें कोई तकनीकी समस्या नहीं आई और वाहन की प्रदर्शन संतोषजनक रही। इसके बाद, Ashok Leyland ने 100 प्रतिशत मेथेनॉल पर चलने वाले डेडिकेटेड इंजन भी विकसित किए हैं।
विस्तार की योजना
सिर्फ ट्रक-बस ही नहीं, इन वाहनों में भी होगा इस्तेमाल
मेथेनॉल का उपयोग केवल कमर्शियल ट्रकों और बसों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार का मानना है कि इसका उपयोग अन्य क्षेत्रों में भी किया जा सकता है, जिससे डीजल की खपत कम होगी और संचालन लागत में कमी आएगी।
देखिए लिस्ट-
कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट
ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी
हार्वेस्टर
नदी और समुद्री जहाज
औद्योगिक मशीनें
अन्य वैकल्पिक ईंधन
इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल भी बनेंगे डीजल का विकल्प
गडकरी ने बताया कि मेथेनॉल के अलावा, इथेनॉल से बनने वाला आइसो-ब्यूटानॉल भी डीजल का एक मजबूत विकल्प बन रहा है। किर्लोस्कर ग्रुप ने 100 प्रतिशत आइसो-ब्यूटानॉल और इथेनॉल पर चलने वाले जनरेटर सेट विकसित किए हैं। भविष्य में इनका उपयोग कृषि उपकरणों, ट्रैक्टरों, हार्वेस्टरों और कंस्ट्रक्शन मशीनरी में किया जा सकेगा।
किसानों और अर्थव्यवस्था को लाभ
किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को कैसे होगा फायदा?
मेथेनॉल का उत्पादन देश में ही किया जा सकता है। सरकार पूर्वोत्तर राज्यों में बांस रिफाइनरी के जरिए इसका उत्पादन बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा, और भारत का फॉसिल फ्यूल इम्पोर्ट बिल भी कम हो सकता है।
पर्यावरण के लिए फायदेमंद
पर्यावरण के लिए भी बेहतर
मेथेनॉल, इथेनॉल और आइसो-ब्यूटानॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन डीजल की तुलना में कम प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। यही कारण है कि सरकार इन्हें सड़क परिवहन के साथ-साथ जल परिवहन में भी बढ़ावा देना चाहती है। यदि इनका बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू होता है, तो इससे भारत को क्लीनर एनर्जी, कम ईंधन खर्च और ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई लाभ मिल सकते हैं।